एक मजदूर जो कैं’सर का पेशेंट है. जो जिंदगी और मौ’त से जूझ रहा है. उसकी जिंदगी तभी बचेगी, जब उसके दोनों पैर का’ट दिए जाएंगे. क्योंकि मजूदर को उसके पैर में ही कैं’सर हो गया है. जिंदगी बचाने के लिए उसे O+ ब्ल’ड की जरूरत थी. 48 घंटे से इस ब्लड ग्रुप का कोई भी व्यक्ति मिल नहीं रहा था.
कई लोगों से बातचीत कई गई. कॉन्टैक्ट कर ब्लड अरेंज करने को कहा गया. लेकिन कोई सफलता मिलती नहीं दिख रही थी. ऐसे में बिहार पुलिस की एक महिला सब इंस्पेक्टर को इस मा’मले की जानकारी हुई. सोमवार को वो जिंदगी और मौ’त से जूझ रहे मजदूर इंद्रजीत पासवान को देखने पहुंची.

जब उन्हें पूरे मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने मजदूर के लिए अपना ब्ल’ड देने की बात कही. यह पूरा मामला नालंदा जिले के बेन थाना इलाके का है. पिंकी प्रसाद 2009 बैच की सब इंस्पेक्टर हैं और ब्लड इन्होंने ही डोनेट किया है. दिसंबर 2018 से ही पिंकी प्रसाद बेन थाना की कमान संभाल रही हैं, वहां की थानेदार हैं. कैंसर पेशेंट मजदूर इंद्रजीत पासवान भी उन्हीं के थाना इलाके का रहने वाला है.
महिला थानेदार ने बढ़ाया पुलिस का मान
एक गंभीर बीमारी से ग्र’सित व्यक्ति को महिला थानेदार का ब्ल’ड डोनेट करना इसलिए खास बन गया कि कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से लोग मदद के लिए सामने नहीं आ रहे हैं. इस महिला पुलिस पदाधिकारी की यही बात बिहार पुलिस के मुखिया गुप्तेश्वर पांडेय के दिल को छू गई. पिंकी प्रसाद के ब्लड डोनेट करने का एक वायरल फोटो डीजीपी ने देखा था. फोटो देखकर डीजीपी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया. मंगलवार को कॉल उन्होंने महिला थानेदार से बात की. पूरे मामले को जाना और फिर बिहार पुलिस का मान बढ़ाने के लिए महिला सब इंस्पेक्टर का हौसला बढ़ाया.
साथ ही आगे भी सेवा भाव के साथ ड्यूटी करते रहने को कहा. डीजीपी ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद कोरोना वायरस के जंग में शामिल पुलिस जवानों और अफसरों को वो सम्मानित करेंगे. इसमें मजदूर को अपना ब्ल’ड देने वाली महिला सब इंस्पेक्टर पिंकी प्रसाद का भी नाम शामिल होगा.



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