Breaking NewsDELHIUTTAR PRADESH

युवक ने ट्वीट कर मदद की गुहार लगाई, पुलिस ने 760 KM दूर हृदय रो’ग पी’ड़ित बुजुर्ग के लिए पहुंचाई दवाई…

लॉकडाउन में पुलिस रोजाना जरूरतमंद लोगों के लिए मसीहा के तौर पर सामने आ रही है। ऐसा ही मामला मंगलवार को सामने आया जहां नोएडा पुलिस की पीआरवी ने हृदय रो’ग से पी’ड़ित बुजुर्ग को दिल्ली से 760 किलोमीटर दूर बहराइच दवा पहुंचाकर मानवता और सेवा की नई मिसाल पेश की है।

दिल्ली निवासी युवक ने दिल्ली पुलिस को ट्वीट किया था कि उसके दादा बहराइच में रहते हैं। उन्हें दिल की गं’भीर बीमा’री है। उनका इलाज दिल्ली से चल रहा है और यहां से ही उनकी दवाई जाती है। कई दिन से उनकी दवाई खत्म हो गई है। युवक ने बताया कि लॉकडाउन के कारण वह बहराइच नहीं जा सकते हैं। इस सूचना को संज्ञान मे लेकर डीसीपी साउथ दिल्ली ने दवाई की व्यवस्था कराकर डीसीपी ट्रैफिक गौतमबुद्ध नगर से बात की। वहां से दवाई बहराइच भेजने के लिए नोएडा पहुंचाई गई। बुजुर्ग तक दवा पहुंचाने के लिए 760 किलोमीटर तक पीआरवी जुड़ती चली गईं।
प्रदेश की छह पीआरवी ने एक दूसरे जुड़कर बुजुर्ग तक दवाई पहुंचाई। नोएडा में दवाई आने के बाद ट्रैफिक इंस्पेक्टर नोएडा ने एंबुलेंस द्वारा दवा लखनऊ भेजते हुए डायल 112 को सूचित किया। सुबह 3 बजे पीआरवी 0476 ने दवा को आलमबाग नहर के पास लिया। सुबह 6:30 बजे बहराइच बॉर्डर पर पीआरवी 1531 द्वारा दवा ली गई। यहां से पीआरवी 1536 थाना नानपारा को मटेरा चौराहे दवा दी गई। पीआरवी 1556 थाना मोतीपुर से दवा को 80 किलो मीटर दूर गांव बेगमपुरा मतेहीकला मे बुजुर्ग को दवाई उपलब्ध कराई।

पहले भी बन चुकी मददगार

1. पांच दिन पहले फेज-3 में रहने वाले एक बीमार युवक ने ट्विटर पर डायल 112 पर कॉल करके मदद मांगी। उसके बाद पीआरवी बीमार युवक के पास पहुंची। यहां से निजी वाहन की व्यवस्था करके पीड़ित को अस्पताल पहुंचाया।

2. तीन दिन पहले वाजिदपुर के युवक ने ट्वीट कर बताया था कि उसकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। इसके बाद पीआरवी 1850 मौके पर पहुंची। पुलिस ने युवक को अस्पताल तक पहुंचाया।

रोजाना लोग लगा रहे गुहार

लॉकडाउन की घोषणा के बाद से प्रतिदिन ट्विटर सहित अन्य सोशल मीडिया पर 200 से 300 जरूरतमंद पुलिस से मदद की गुहार लगा रहे हैं। कोई राशन के लिए तो कोई दवाई के लिए। सूचना मिलने के बाद पुलिस तुरंत उनके पास पहुंचकर मदद कर रही है। यह सिलसिला अभी भी जारी है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.