बिहार के दरभंगा में एक मां की ची’ख,वेदना और मदद की गुहार ने जहां मानवता को श’र्मसार किया है वहीं करुणा और दया के सारे मर्म को दफन भी किया है ।एक ऐसी घ’टना जो इंसानियत के सारे मूल्यों को चाक कर रही है ।
जबतक मासूम जिं’दा थी,यह मां अपने बच्चे के इलाज के लिए डॉक्टरों की तला’श में सड़कों पर बिल’खती और विलाप करती हुई,दौड़ती और भागती रही ।दरअसल, दरभंगा के हॉस्पिटल रोड के रहने वाले छनु सहनी लॉकडॉन में दिल्ली में फंसे है ।दिल्ली के स्टील फैक्ट्री में काम करने वाले छन्नू सहनी एवं अंजू देवी की 9 वर्षीय बच्ची को घर मे खेलते हुए पीठ में गहरी चो’ट आई थी ।बदकिस्मती देखिए कि ना तो इस महिला को एक भी ऑर्थोपेडिक सर्जन मिले और ना ही सरकारी एम्बुलेंस ।ममता और बच्चे की जिंदगी के मोह के आँचल में,अपने मासूम बच्चे को लपेटे,यह मां बस मदद के लिए दौड लगाती रही ।लेकिन मां की ममता हार गई और यमराज ने इस बच्ची की इहलीला खत्म कर डाली ।बच्चे की मौ’त से महिला पूरी तरह से टू’ट गयी ।

द’र्द,पी’ड़ा,बे’बसी और दु’र्भाग्य का दौर,यहीं खत्म नहीं हुआ ।बच्ची की मौ’त के स’दमे में डू’बी,इस मां को बच्चे के क’फन के लिए भी कई जगहों पर हाथ फैलाने पड़े लेकिन क’फन भी मयस्सर नहीं हो रहा था ।थक-हार कर यह बेबस माँ, पुलिस वालों के पास पहुंची और एक कफ़न दिला दो,की गुहार लगाई लेकिन पुलिस वालों से भी उसे निरा’शा ही हाथ लगी ।पुलिस वालों ने कहा कि हम कहाँ से क’फन लाकर देंगे ।जाओ किसी सामाजिक संगठन वालों से कफन मांगों ।पुलिस वालों का यह रवैया,बेद’र्दी से भरा और मदद की जगह,एक बला को टर’काने वाला रहा ।
आखिरकार यह महिला ढूंढ़ते-ढूंढते एक समाजेसेवी संगठन के पास पहुंची,जहां मृ’तक बच्चे के कफन का इंतजाम हो सका ।बच्चे की मौत के बाद क’फन के लिए तरसती इस मां को क’फन तो मिल गया लेकिन लॉक डाउन में किसी की मौ’त पर कोई दुः’खी हो रहा है,इस भ्रम पर से पर्दा उठ गया है ।लॉकडाउन के दौरान भी गरीबी और अमीरी, प्रभाव और बेबसी का असर,साफ तौर पर दिख रहा है ।एक बेबस मां ने अपने वि’लाप से सिस्टम के लिए कई सवाल छोड़े हैं ।लेकिन इसका जबाब मिलना नामुमकिन है ।



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