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मुजफ्फरपुर में आज भी दह’शत में जी रहे 700 परिवार, राशन से लेकर दवा तक के लिए जाना पड़ता है नदी पार

साहब… 12 घरों का तो चिराग इस नाव हादसे में बुझ गया। कई परिवारों की खुशियां लुट गयीं। अब हमारे घर में भी अंधेरा न छा जाये, इसके लिए मधुरपट्टी-भटगामा घाट पर पुल बनवा दीजिए। ताकि, बिना दहशत के हमारे लाल नदी पार कर पढ़ाई करने से लेकर और दूसरे काम के लिए जा सकें। ये बातें मधुरपट्टी गांव के लोग बोल रहे है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब से यह नाव हादसा हुआ है, पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। किसी घर में चूल्हा तक नहीं जल रहा है। अलग-अलग दलों के नेता आ रहे हैं, लेकिन अब तक किसी ने सही से उनकी फरियाद नहीं सुनी। अगर 700 से अधिक परिवारों की फरियाद पहले नेता व प्रशासन के लोग सुन लिये होते, तो इतना बड़ा हादसा नहीं हुआ होता। आज हर तरफ मातम पसरा है। हमें अपना हक दीजिए। बस एक पुल बनवा दीजिए।

रस्सी और तार के सहारे चलती नाव

रस्सी और तार के सहारे चलती नाव

6 महीने में देते है नाविक को 15 किलो अनाज

बागमती नदी में मधुरपट्टी गांव से भटगामा जाने के दौरान हुए नाव हादसे के बाद से गांव के लोगों में सरकार व जिला प्रशासन के खिलाफ काफी आक्रोश है। एक बुजुर्ग ने कहा कि मेरी उम्र करीब 65 साल की है। जब से हम होश संभाले अब तक सैकड़ों लोगों की जान चली गयी। लेकिन, बागमती नदी पर कोई पुल नहीं बन पाया। मधुरपट्टी गांव के अलावा भी कई गांव के लोग भटगामा जाने के लिए नाव का प्रयोग करते हैं। नदी पर 24 घंटे नाविक मौजूद रहता है।

मधुरपट्टी गांव के लोगों का कहना है कि हर साल करीब 700 परिवार नाविकों को अपने- अपने घर से 15 किलो अनाज देता है। अगर, सरकार पुल का निर्माण करवा देती तो आज यह हादसा नहीं होता। अब नेता आ रहे है आश्वासन देंकर जा रहे है। फिर, चार लाख का चेक थमा कर चले जाएंगे। और हम और हमारा परिवार फिर से नदी में डूबकर मरते रहेंगे

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