बिहार पुलिस में सिपाही बनी तो सोचा अब अपनी कलाई में चूड़ियां नहीं, अपराधियों को हथकड़ी पहनाऊंगी। कानून व्यवस्था के लिए हमेशा डटकर मुकाबला करूंगी, लेकिन ड्यूटी लगी तो सिस्टम से लड़ाई शुरू हो गई। यूरिन के डर से ड्यूटी पर पानी नहीं पीती। किडनी में कांटा जैसा चुभता है, लेकिन अपना दर्द किसी से कह नहीं पाती…।
ड्यूटी पर निकलने से पहले टॉयलेट की चिंता रहती है। पानी कम पीने के बाद भी कभी जरूरत महसूस हुई तो इन्फेक्शन के डर से पब्लिक टॉयलेट यूज नहीं करती। यूरिन से ब्लैडर फूल जाता है, लेकिन अपना दर्द किसी से साझा नहीं कर पाती। अनुशासन वाले विभाग में अपना दर्द भी बयां नहीं कर सकती…।
ये दर्द भरी कहानियां उन महिला सिपाहियों की है, जो अपराधियों से नहीं सिस्टम से परेशान हैं। वह ड्यूटी पर हर दिन ऐसे ही सिस्टम से लड़ रही हैं। अनुशासन वाले विभाग में कार्रवाई के डर से वह अपनी समस्या भी नहीं बता पाती हैं। ऑन कैमरा बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाने वाली कई महिला सिपाहियों ने भास्कर की महिला रिपोर्टर से अपना दर्द साझा किया।

पटना ट्रैफिक पुलिस में ऑफिसर्स समेत 228 महिला कर्मी हैं।
पहले कुछ आंकड़े जान लीजिए…
बिहार देश का ऐसा राज्य है जहां सबसे अधिक महिला पुलिसकर्मी कार्यरत हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में 24 हजार से अधिक महिला पुलिसकर्मी हैं। यह देश का लगभग 26% है, लेकिन इन्हें ड्यूटी के दौरान बाथरुम के लिए दूसरों के घरों का सहारा लेना पड़ता है।
हमने राजधानी पटना में महिला पुलिसकर्मियों से बात की। खासकर हमारी चिंता ट्रैफिक संभालने वाली महिलाकर्मियों को लेकर थी। पटना ट्रैफिक पुलिस में ऑफिसर्स समेत 228 महिलाकर्मी हैं।
हमने पटना के 5 मुख्य ट्रैफिक पॉइंट पर महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती का जायजा लिया। हमें जो दिखा, वो बताएंगे, लेकिन उससे पहले जानिए कि आखिर इनका दर्द क्या है-
पटना में फील्ड ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों का कहना है कि ड्यूटी के वक्त वह पानी कम पीती हैं। ड्यूटी किसी ऐसी जगह लग जाए, जहां बाथरुम की सुविधा न हो तो उस जगह पर वह पानी पीती ही नहीं हैं। ताकि टॉयलेट ना आए।
उन्होंने कैमरे पर आए बिना और नाम गुप्त रखने की शर्त पर दैनिक भास्कर से बात की। महिला पुलिस ने बताया- पटना के पब्लिक टॉयलेट की हालत ऐसी है कि वहां यूरिन डिस्चार्ज करना तो दूर, बगल से गुजरना भी कोई पसंद नहीं करता। अगर ना चाहते हुए भी पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करना पड़ता है तो कई सारी शारीरिक परेशानियां शुरू हो जाती हैं।
वैसी जगह जाकर यूरिन डिस्चार्ज से इन्फेक्शन हो जाता है। जिससे दर्द, जलन और चिड़चिड़ापन रहता है, लेकिन फिर भी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। परेशानी होने पर छुट्टी तक नहीं मिलती। टॉयलेट करने के लिए हमें मॉल, पेट्रोल पंप, स्कूल-कॉलेज या फिर किसी के घर का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।
क्या करें…बहुत शर्म भी आती है, लेकिन कभी-कभी ऐसी परिस्थितियों बन जाती हैं कि जाना ही पड़ जाता है। अगर माहवारी का समय चल रहा हो तब तो और ज्यादा परेशानी बढ़ जाती है।
सरकार की तरफ से दो दिनों की छुट्टी मिल जाती है, लेकिन बाकी के तीन दिनों में काफी परेशानी हो जाती है। पैड चेंज करना, वॉशरूम जाना, इंटिमेट एरिया को साफ रखना…हमारे लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है, लेकिन क्या करें…धीरे-धीरे अपने बॉडी को सिस्टम के अनुसार ढाल देते हैं।
महिला ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को सबसे ज्यादा परेशानी
ट्रैफिक में तैनात महिला पुलिस का हाल तो और बेहाल है। दिनभर धूप और बारिश में खड़े होकर ट्रैफिक नियमों का पालन करवाने वाली ये महिलाकर्मी बताती हैं कि दिनभर धूप और बारिश में खड़े रहते हैं, लेकिन पानी कम पीती हूं। डर लगता है कि टॉयलेट ना आ जाए। पेट्रोल पंप और स्कूल का सहारा लेना पड़ता है। जहां यह दोनों न तो वहां पानी पीने से बचती हूं। टॉयलेट आने पर भी उसे रोक कर रखती हूं।
महिलाकर्मी कहती हैं- हम कहने को तो पावरफुल बॉडी हैं, लेकिन खुद के सिस्टम से लड़ रहे हैं। टॉयलेट रोकने से इंटिमेट एरिया में जलन महसूस होती है। जिससे बार-बार टॉयलेट का एहसास होने लगता है, लेकिन मुंह से एक उफ तक नहीं निकाल सकते।
अभी जहां मैं ट्रैफिक नियमों का पालन करवा रही हूं। वहां पर ट्रैफिक पुलिस के लिए एक केबिन तक नहीं है। सुबह से शाम तक हम यहीं पर तैनात रहती। स्पेशल भी आकर देख कर गए हैं कि यहां केबिन की जरूरत है, लेकिन पेड़ की छांव में ही कुर्सी लगाकर केबिन चल रहा है। प्रॉब्लम बताओ तो नौकरी से हाथ धोने का डर सताता है। इसलिए कभी कुछ बोला ही नहीं।
जहां पब्लिक टॉयलेट, वहां सिर्फ बदबू
इन महिलाकर्मियों से बात करने के बाद दैनिक भास्कर ने पटना के 5 मुख्य चौराहों पर महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती का जायजा लिया। भास्कर ने ये पता करना चाहा कि इन जगहों पर पब्लिक टॉयलेट का क्या हाल है।
हमारी रिपोर्टर एग्जीबिशन रोड, डाकबंगला चौराहा, हाईकोर्ट, उद्योग भवन और कोतवाली थाना के आस-पास के एरिया की पड़ताल की। पता चला कि गांधी मैदान के पास दो पब्लिक टॉयलेट है। बाकि जगहों पर पब्लिक टॉयलेट हैं ही नहीं। गांधी मैदान के गेट नंबर 7 के पास जो पब्लिक टॉयलेट है, उसकी स्थित बद-से-बदतर दिखी। हर तरफ गंदगी और बदबू फैली हुई थी। बेसिन के पाइप टूटे हुए थे। पेशाब बाहर तक फैला था।





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