कोरोना संक्रमण के कारण चल रहे लॉकडाउन के बीच मुकद्दस रमजान 23 या 24 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इसको लेकर शहर-ए-काजी मुफ्ती आबिद हुसैन ने कहा कि रमजान के महीने में जो लोग मस्जिद में इफ्तारी भेजते थे, वे इस साल भी करें। लेकिन, मस्जिद की बजाय जरूरतमंदों के घर पहुंचाएं। रमजान में इफ्तार पार्टियां करने वाले इसकी रकम से गरीबों को राशन बांटें। रोजेदार ये तय करें कि कोई भी इंसान भूखा न रहे। जिन लोगों पर जकात फर्ज है, वे गरीबों में जकात जरूर बांटें। वहीं, कई युवा और मुस्लिम सामाजिक संगठन सोशल मीडिया पर रमजान को लेकर इन दिनों काफी सक्रिय हो गए हैं। वेे घर के उलेमाअाें और मुफ्ती से संपर्क कर रमजान में की जाने वाली इबादतों अाैर जकात के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
न कैलेंडर छपे न कार्ड, सोशल मीडिया पर साझा करेंगे सहरी-इफ्तार का टाइम टेबल
रमजान 23 या 24 अप्रैल से शुरू हो रहा है, लेकिन अभी तक न रमजान कैलेंडर छपे हैं और न ही कार्ड। छपाई पर 15 से 20 हजार रुपए लग जाते हैं। इन कैलेंडरों अौर कार्डों पर सहरी व इफ्तार के वक्त के अलावा सहरी-इफ्तार की दुआ का टाइम टेबल अंकित रहता है। पहले कैलेंडर व कार्ड छपने के लिए एक महीना पूर्व ही चला जाता था। लेकिन, काेराेना वायरस काे लेकर घाेषित लॉकडाउन के चलते कुछ ही मस्जिदों व मदरसों में प्रिंट हो पाया है। ऐसे में जिनके यहां कैलेंडर अाैर कार्ड प्रिंट हाे गए हैं, वे दुविधा में हैं। कैलेंडर अाैर कार्ड छपवा तो लिए हैं, लेकिन अब समाज के लाेगाें में बंट नहीं पा रहे हैं। ऐसे में मदरसा फैजुल उलूम, धातकीडीह, मरकाजी दारूल केरात जियाईया, आजादनगर मदीना मस्जिद कमेटी के सदस्याें ने लोगों तक कैलेंडर और कार्ड पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जाएगा। मस्जिद कमेटियां व्हाट्सएप और फेसबुक पर सहरी-इफ्तार का समय सारणी पोस्ट करेंगी, ताकि रोजेदारों की मुश्किलों का सामना न करना पड़े।



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