स्कूली शिक्षा सूचकांक में नालंदा को सूबे में पहला स्थान मिला है। सबसे खराब स्थिति अररिया और सुपौल की है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से सत्र 2021-22 के लिए जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (2.0) यानी पीजीआई में नालंदा ने सबसे अधिक ओवरऑल 338 का स्कोर हासिल किया है। इस लिस्ट में पटना ने ओवरऑल 312 अंकों के साथ 8 वां स्थान हासिल किया है। मुजफ्फरपुर को इस सूची में 13 वां स्थान मिला है। सूबे के 13 जिलों को प्रचेष्टा -1 ग्रेड में रखा गया है।
23 जिलों को प्रचेष्टा -2 की ग्रेडिंग की गई है। प्रचेष्टा – 3 का ग्रेड 2 जिलों को मिला है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट में बिहार को 12 राज्यों के साथ आकांक्षी – 2 ग्रेड में रखा गया है। इसका स्कोर 465 है। मंत्रालय की ओर से जारी इंडेक्स स्कूली शिक्षा में परिवर्तनकारी बदलाव करने के लिए आवश्यक हस्तक्षेपों की पहचान करने में मददगार है। इसकी शुरूआत वर्ष 2017 में हुई थी। शिक्षाविद् प्रो. प्रमोद कुमार ने बताया कि पीजीआई के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 10 श्रेणियों में ग्रेडिंग होती है।
लिस्ट में पटना ने ओवरऑल 8वां स्थान हासिल किया है
इन 10 ग्रेडों में होती है राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों की रैंकिंग : दक्ष, उत्ककर्ष, अति उत्तम, उत्तम, प्रचेष्टा-1, प्रचेष्टा-2, प्रचेष्टा-3, आकांक्षी-1, आकांक्षी-2 और आकांक्षी-3।
83 इंडिकेटर के आधार पर हुई जिलों की ग्रेडिंग : जिलों की ग्रेडिंग 83 इंडिकेटर के आधार पर हुई है। इसके लिए कुल 600 अंक निर्धारित हैं। इंडिकेटर को 6 ग्रुप में बांटा गया है। इसमें आउटकम्स (290), इफेक्टिव क्लासरूम ट्रांजैक्शन (90), इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटीज स्टूडेंट एंटाइटलमेंट्स (51),स्कूल सेफ्टी एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन (35), डिजिटल लर्निंग (50) और गवर्नेंस प्रोसेसेज (84) शामिल हैं।
डिजिटल लर्निंग के मोर्चे पर सभी जिलों को दहाई का स्कोर भी नहीं : डिजिटल लर्निंग के मोर्चे पर बिहार के जिले फिसड्डी साबित हुए हैं। 38 जिलों में से एक भी जिला दहाई अंक पर नहीं पहुंचा।




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