जयनगर से लोकमान्य तिलक जाने वाली पवन एक्सप्रेस के टूटे हुए पहिया के सेट को लखनऊ जांच के लिए भेजा गया है। लखनऊ स्तिथ रिसर्च डिवलेपमेंट एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) की टीम चक्के को अपने साथ लेकर चली गयी है। जहां पहिया के तत्वों (एलीमेंट) की जांच करेगी।
साथ ही एलीमेंट के वैरिएशन को भी परखेगी। फिर तय करेगी कि किस एलीमेंट की कमी या अधिकतता की वजह से पवन एक्सप्रेस के बोगी एस 11 के पहिया का फ्लैंच टूटा था। मालूम हो कि देर रात तक आरडीएसओ और हरनौत रेल करखाना के इंजीनियर मैराथन तफ्तीश करते रहें। लेकिन, किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे।
मुजफ्फरपुर यार्ड में हुई जांच में सिर्फ इतना ही पता कर सके कि पहिया का मैटेरियल खबरा गुणवत्ता का था। जिससे पहिया का फ्लैंच टूट गया।इधर, विशेषज्ञों की माने तो एक पहिया कई एलीमेंट से बना होता है। इसमें कार्बन, क्रोमियम, मैंगनीज, निकेल, सिलिकॉन, मोलीबदेनियम, फास्फोरस, कॉपर, सल्फर, वैनेडियम शामिल होता है।
अब लखनऊ स्थित रिसर्च डिवलेपमेंट एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन इसके एलीमेंट की जांच होगी। आरडीएसओ की टीम ने पहिया का सेट यानी टूटा का पहिया फ्लैंज सहित और टूटा हुआ टूकड़ा भी साथ ले गयी है। तीनों हिस्सा के एलीमेंट की जांच होगी। फिर रिपोर्ट तैयारी की जायेगी।
बताते चले की जयनगर से मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली 11062 पवन एक्सप्रेस बड़ी दुर्घटना का शिकार होने से बच गयी थी। ट्रेन कुढ़नी और गोरौल स्टेशन के बीच पहिया का फ्लैच टूट गया था। चलती ट्रेन से तेज आवाज आयी और ट्रेन असंतुलित होने लगी। लोको पायलट ने ट्रेन की रफ्तार कम की। धीरे-धीरे ट्रेन को भगवानपुर स्टेशन पर ले जाकर रोक दिया। जांच के दौरान पता चला कि एस-11 बोगी के व्हील का फ्लेंच टूट गया था।



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