शिवभक्तों में कृष्णा बम की पहचान बिल्कुल अलग है. मुजफ्फरपुर की रहनेवाली कृष्णा बम सुलतानगंज से जल भरकर सावन के हर सोमवार को 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर में जलार्पण करती रही हैं. उनकी शिवभक्ति इतनी गहरी है कि वे शिव की पूजा के लिए 2018 में पाकिस्तान के कटास राजधाम तक जा चुकी हैं. इस बार वे 71 वर्ष की हो चुकी हैं. नतीजतन इतनी लंबी पैदल यात्रा उनके लिए संभव नहीं. इसलिए 40 वर्षों से चला आ रहा उनका यह सिलसिला इस बार टूट जाएगा. कांवड़िया पथ पर कृष्णा बम का इंतजार करते शिवभक्तों को इस बार निराशा होगी
कृष्णा बम 1982 से डाक बम के रूप में सुलतानगंज से जल लेकर देवघर में पूजा करती आ रही थीं. वे 105 किलोमीटर की यात्रा महज 18 घंटे में तय कर लेती थीं. जबकि आम कांवड़िये को ये दूरी तय करने में 3 से 4 दिन का वक्त लगता है. कृष्णा बम 40 वर्ष तक हर साल बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण करने देवघर आती रहीं. जब कृष्णा बम सुलतानगंज से जल भरकर देवघर का रास्ता डाक कांवड़िये के तौर पर तय करती थीं तो रास्ते में लोग उनका आर्शीवाद लेने के लिए खड़े रहते थे. पुलिस प्रशासन उन्हें सुरक्षा देता था.
कृष्णा बम मूलतः बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के चकवासु की रहनेवाली हैं. इनका जन्म वैशाली जिले में हुआ है. उन्होंने 1967 में मैट्रिक पास की. इंटर के बाद राजनितिक विज्ञान से बीए की. उसके बाद सरकारी शिक्षिका बनीं. वहीं 2013 में शिक्षिका के पद से सेवानिवृत्त हुईं. एक बार इनके पति नन्दकिशोर पंडित किसी बड़ी बीमारी से ग्रसित हो गए थे. तब इन्होंने संकल्प किया कि पति के ठीक होने पर प्रत्येक साल सावन में बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण करने जाएंगी.
कृष्णा बम इतनी बड़ी शिवभक्त हैं कि उनकी पूजा के लिए 2018 में पाकिस्तान के कटास राजधाम तक चली गईं. वहां भोले बाबा पर जलाभिषेक किया. 1989 में इन्होंने गंगोत्री से रामेश्वरम तक की 4500 किलोमीटर की लम्बी यात्रा पैदल तय की थी. वहीं 2014 में कैलाश मानसरोवर गईं. कृष्णा बम ने 1975 में पहलेजा से गरीबनाथ तक यात्रा कर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक किया था, यह इनकी पहली कांवड़ यात्रा थी.



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