समस्तीपुर में पिछले दो दिनों के दौरान अचानक बूढी गंडक नदी का जलस्तर बढने लगा है। नदी के जलस्तर में बढोतरी के साथ ही नागरबस्ती और आसपास के लोग सहम गए हैं। नागरबस्ती मस्जिद के पास नदी की धारा कटाव कर बाध से सट पर बह रही है। पुराना बंडाल व ईंट सोलिंग भी खराब रहने से लोगों को 1987 की याद आने लगी है। बताया गया है कि वर्ष 1987 में इस स्थान से कुछ मीटर पहले बेगमपुर के पास बांध टूट गया था। जिससे कई लोगों की मौत हो गई थी। वहीं कितने लोग बेघर हो गए थे।
नागरबस्ती गांव के ही मो. नाजिर हुसैन ने बताया कि मस्जिद के पास नदी कटाव कर एकदम बांध से सट गई है। जिससे इस बांध पर खतरा उत्पन्न हो गया है। चुकी मस्जिद के पास वर्षों पुराना ईंट का बंडाल ध्वस्त हो चुका है। वही मस्जिद से पूरव की ओर बांध को बचाने के लिए ईंट की सोलिंग की गई थी। वह भी जर्जर हो गई है। वहीं रेन कट ने लोगों की नींद उड़ा दी है। मस्जिद के दोनों ओर 10 से अधिक रेन कट हैं।


नागरबस्ती के पास बूढी गंडक नदी का हो रहा कटाव
गांव के ही विकास कुमार बताते हैं पुराना बंडाल सालों पूर्व ध्वस्त हो गया। नये बंडाल का निर्माण नहीं कराया गया है। नदी के बढने के बाद भी जल संसाधन विभाग के लोग देखने तक नहीं आए हैं।
मथुरापुर से सतमलपुर तक 20 से अधिक स्थानों पर रेन कट
बूढी गंडक नदी के बांया तटबंध मथुरापुर घाट से लेकर सतमलपुर करीब 8 किलोमीटर में भास्कर के टीम ने जांच की। इस दौरान मथुरापुर से सतमलपुर गांव तक 20 से अधिक रेन कट हैं। लेकिन विभागीय स्तर पर रेनकट को भरने का कार्य नहीं किया गया हे। जिससे लोग सहमे हुए हैं। इन स्थानों पर रेनकट के साथ ही चूह ने अपना बिल बना कर रखा है। स्थानीय लोगों ने कहा कि जल्द से जल्द विभागीय लोगों को इस ओर ध्यान नही दिया।

बांध में सटी नदी का धारा
वर्ष 1987 में टूटा था बेगमपुर बांध
वर्ष 1987 में बूढी गंडक नदी का बांयां तटबंध के बेगमपुर स्लुईस गेट के पास टूट गया था। जिससे इस घटना में कई लोगों की मौत भी हो गई थी। स्लुईस गेट के पास 10-15 टैक्टर मिट्टी जमा कर रखा गया है। ताकि बांढ आने के दौरान मिट्टी के लिए परेशानी नहीं हो।
अधिकारी बोले- सभी कटाव पर विभाग के लोगों की नजर
फ्लड कंट्रोल के ईई राकेश रंजन ने बताया कि सभी कटाव पर विभाग के लोगों की नजर है। इस दौरान बने नये रेनकट को भरने की कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा भी बारिश के कारण हुउ कटाव पर नजर रखी जा रही है। नदी के जलस्तर में अभी वैसी वृद्धि नहीं हुई है। वैसे बांधों की पेट्रोलिंग की जा रही है।



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