कोरोना वायरस के संक्रमण (Corona virus infection) के खतरों के बीच एक ओर जहां डॉक्टरों की त्याग भावना हमें देखने को मिल रही हैं. आम से लेकर खास, सभी उनके लिए एक स्वर से प्रशंसा कर रहे हैं. वहीं, इसी दौर में कुछ ऐसे भी हैं जो इस पवित्र पेशे की साख पर बट्टा लगा रहे हैं. विभिन्न स्तरों पर इनकी ला’परवाही व संवेदनहीनता सामने आ रही है. बात मोक्ष नगरी गया की करते हैं. यहां अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल (ANMMCH) को राज्य सरकार ने कोरोना के इलाज के लिए कोविड अस्पताल घोषित कर दिया है. इस नई व्यवस्था के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एएनएमसीएच के इमरजेंसी और अन्य बीमारी के इलाज के लिए जय प्रकाश नारायण अस्पताल और प्रभावती अस्पताल को चिन्हित किया है. पर इन दोनों अस्पतालों में घोर लापर’वाही दिख रही है.
अधिकांश मरीजों को रेफर किया जा रहा
प्रभावती अस्पताल अंग्रेज के शासन के दौरान महिला अस्पताल के रूप में शुरू की गयी थी. इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना को लेकर की गयी नयी व्यवस्था में स्त्री रोग और शिशु रोग के मरीज के इलाज की व्यवस्था यहां की है. जिसके लिए एएनएमएसीएच के डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति भी यहां की गयी है पर यहां अधिकांश मरीजों का इलाज के बजाय सिर्फ रेफर किया जा रहा है.
डिलीवरी मरीज को छूने को भी तैयार नहीं हुए डॉक्टर
जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर नक्सल प्रभावित डुमरिया से अपनी पत्नी उर्मिला देवी की डिलीवरी के लिए आये रवि ने बताया कि मरीज को खून की कमी बताकर पटना रेफर कर दिया गया. वे लोग ब्लड देने के लिए तैयार थे पर डॉक्टर मरीज को छूने को तैयार नहीं हुए. जबकि उनका मरीज दर्द से कराह रही थी.
इस संबंध में प्रतिनियुक्त डॉक्टर वजीउद्दीन से न्यूज 18 की टीम ने बात करने की कोशिश की तो वे लेबर रूम की तरफ भाग खड़े हुए और अंत में परिजन रोते हुए उर्मिला देवी को दूसरे अस्पताल लेकर चले गये.

गर्भ में ही म’र गया था बच्चा पर कर दिया रेफर
वहीं, एक दूसरी महिला रेखा देवी भी यहां डिलीवरी के लिए यहां भर्ती हुई. बताया जा रहा है कि उसका बच्चा गर्भ में ही मर चुका था. डॉक्टर ने इसे भी खून की कमी बताकर रेफर कर दिया. परिजन खून देने के लिए तैयार थे पर डॉक्टर ऑपरेशन कर मृ’त बच्चे को निकालने के लिए तैयार नहीं हुए और उसे जबरदस्ती रेफर कर दिया. यही नहीं दूसरे अस्पताल जाने के लिए एबुलेंस तक मुहैया नहीं कराया गया.
अस्पताल प्रबंधन ने दी सफाई
अपने मृ’त बच्चे को पेट में लेकर द’र्द से कराहती महिला रेखा देवी ऑटो से दूसरे अस्पताल चली गयी. एबुलेंस नहीं मिलने की शिकायत पर अस्पताल के प्रबंधक विमलेश कुमार ने बताया कि मरीज के परिजन को एबुलेंस के लिए 15 मिनिट इंतजार करने को कहा गया था. क्योकि अस्पताल का एंबुलेस दूसरे मरीज को पहुंचाने गया था, पर मरीज के परिजन ह’ड़बड़ी में ऑटो से निकल गये.
अस्पताल को धर्मशाला नहीं बनाना चाहते डॉक्टर
प्रभावती अस्पताल की तरह ही जय प्रकाश नारायण अस्पताल का भी हाल है. दो दिन पहले यहां मोहड़ा से एक कुष्ट रोगी गंभीर स्थिति में इलाज के लिए आया. यहां के डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर वापस लौटा दिया.
इस संबंध में अस्पताल के उपाधीक्षक चन्द्रशेखर प्रसाद सिंह ने न्यूज से बात करते हुए कहा कि उनके यहां चर्म रोग के डॉक्टर नहीं हैं. इसलिए वे इस तरह के मरीज को भर्ती करके अस्पताल को धर्मशाला नहीं बना सकते हैं. जबकि हकीकत ये है कि एएनएमएमसीएच को कोरोना अस्पताल के रूप में परिणत किये जाने के बाद वहां के कई विशेषज्ञ डॉक्टरों को जेपीएन में प्रतिनियुक्त किया गया है.
आला अधिकारियों की भी नहीं सुनते डॉक्टर
दोनों अस्पतालों की व्यवस्था को ठीक करने के लिए डीएम और सिविल सर्जन भी कई बार दौरा कर चुके हैं. डॉक्टरों और स्वास्थयकर्मियों को लापरवाही की शिकायत पर चे’तावनी भी दे चुकें हैं पर ऐसा लगता है कि इन दोनों अस्पताल में तैनात डॉक्टर मरीजों का इलाज करने के बजाय किसी न किसी वजह से रेफर कर दे रहें हैं जिससे गरीब मरीज एवं उनके परिजन को काफी परे’शानी उठानी पड़ रही है.
जहानाबाद की घ’टना से भी नहीं लिया सबक
हाल में जहानाबाद सदर अस्पताल (Jehanabad Sadar Hospital) प्रबंधन के एंबुलेंस (Ambulance) नहीं दिए जाने के कारण तीन साल के मासूम (Three Years Old Child) ने मां की गोद में ही दम तो’ड़ दिया था. मामले ने तूल पकड़ा और अस्पताल प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया और साथ ही दो डॉक्टरों, चार नर्सों के चिालाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई. लेकिन ऐसा लगता है कि डॉक्टरी के इस पेशे में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनमें संवेदनशीलता है ही नहीं
Input: News 18



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