साहेबगंज से भाजपा के विधायक डॉ. राजू सिंह ने सीओ और सीआई के साथ मारपीट मामले में शुक्रवार को विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसके बाद उनकी ओर से दाखिल जमानत अर्जी भी वापस ले ली गई। फिर कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। विधायक राजू सिंह के अधिवक्ता प्रणव कुमार ने बताया कि विधायक ने कोर्ट में सरेंडर किया। अग्रिम जमानत अर्जी वापस ले ली गई।
इसके बाद नियमित जमानत की अर्जी दाखिल की गई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद विधायक को जमानत दे दी। अधिवक्ता ने बताया कि सीओ एससी-एसटी कोटि से नहीं आते हैं। कोर्ट ने 16 जून को अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान डीएम से एससी/एसटी की अधिसूचना प्रति मांगी थी। पुलिस ने कोर्ट में डायरी भी जमा कर दी थी। सभी बिंदुओं पर पक्ष रखा गया। पारू के सीओ अनिल भूषण ने 15 अप्रैल को थाने में एफआईआर कराई थी। आरोप लगाया था कि 11 अप्रैल की दोपहर करीब एक बजे विधायक ने कॉल कर बुलाया। प्रभारी अंचल निरीक्षक चंद्रदीप कुमार राम के साथ वह विधायक के बड़ा दाउद स्थित आवास पर पहुंचे। वहां विधायक के साथ अन्य नामजद आरोपित भी बैठे थे। पहुंचते ही विधायक ने गंदी-गंदी गालियां देनी शुरू कर दी। कहा- उनके करीबी डाटा ऑपरेटर सोनू कुमार को हटाने के लिए डीएम को पत्र क्यों भेजा? इसके बाद उन्होंने से कॉलर पकड़ कर उठाया और थप्पड़ से मारा। आरोप लगाया कि सीआई के साथ भी मारपीट कर जाति सूचक शब्द से अपमानित किया गया। मैंने जो कुछ किया वो न्यायसंगत : राजू सिंह भाजपा विधायक राजू सिंह ने कहा कि उन्हें न्याय तो मिलना ही था। वे लोग हमेशा न्यायपालिका में विश्वास रखते हैं, जिसका नतीजा देखना को मिला है। आरोप लगाया कि राजद की सरकार अपराध के खिलाफ बोलने वाले लोगों को सताती है। उन्होंने जो भी किया वो न्यायसंगत किया। कानून के दायरे में रह कर किया। पुलिस उनसे व्यक्तिगत दुश्मनी निभा रही थी। विधायक ने कहा कि वह सीनियर पदाधिकारियों और डीजीपी से मिलेंगे। ज्ञात हो कि राजद नेता तुलसी राय अपहरण कांड में पटना हाईकोर्ट ने राजू सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है।



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