गांव में भी मरीजों को घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा मिलेगी। हर गांव में स्वास्थ्य-स्वच्छता व पोषण समिति बनेगी। इसकी कमान मुखिया के हाथों में होगी। यह समिति सामुदायिक स्वास्थ्य-परिवार कल्याण सेवाओं का संचालन और अनुश्रवण करेगी। राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से जारी गाइडलाइन में कहा गया है कि जिलों में समिति का गठन 25 जून तक कर लेना है।
समिति के कार्यपालक निदेशक संजय सिंह ने कहा है कि प्रत्येक राजस्व गांव स्तर पर एक निगरानी समिति भी होगी। यह इस योजना की मॉनिटरिंग के साथ-साथ उपलब्ध कराई गई राशि के इस्तेमाल पर भी नजर रखेगी। गांव में चलाए जा रहे मातृ-शिशु स्वास्थ्य, नियमित टीकाकरण, किशोर स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, पोषण आदि से संबंधित कार्य-योजनाओं का संचालन व अनुश्रणव करेगी।
पोषण समिति करेगी इसकी निगरानी -व्यवस्था सुदृढ़ करने की पहल
कमेटी और उसका वित्तीय प्रबंधन
कमेटी में 3 से 5 सदस्य होंगे। अध्यक्ष मुखिया होंगे तो सचिव एएनएम होंगी। अन्य 3 सदस्यों में सक्रिय महिला, स्वयं सहायता समूह की एक सक्रिय सदस्य और स्थानीय गैर सरकारी संस्था के एक प्रतिनिधि होंगे। इसके अलावा समिति विशेषज्ञों एवं जनहित से प्रेरित व्यक्तियों में से दो को आमंत्रित सदस्य मनोनीत कर सकती है।
कैसे होगा समन्वय : प्रखंड स्तर पर समन्वय व अनुश्रवण पीएचसी प्रभारी और जिला स्तर पर जिला लेखा प्रबंधक करेंगे। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी नोडल अधिकारी होंगे।
15 जून तक बैंक में खोला जाएगा खाता
पंचायत स्तर पर बनने वाली इस समिति का 15 जून तक बैंक में खाता खुलेगा जिसका संचालन अध्यक्ष व सचिव करेंगे। विभाग 25 जून तक इस खाते में अनटाइड फंड ट्रांसफर कर देगा। हर माह के प्रथम बुधवार को समिति की बैठक होगी। इसमें सभी सदस्य हस्ताक्षर पंजी के साथ कार्यवाही प्रतिवेदन तैयार करेंगे। समिति द्वारा कार्यों का अनुश्रवण जिला एवं प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य एवं पंचायती राज पदाधिकारी और कर्मियों द्वारा किया जाएगा।
स्वास्थ्य-स्वच्छता व पोषण समिति के उत्तरदायित्व
- प्रत्येक माह बैठक कर संचालित योजनाओं की समीक्षा
- देखेगी कि अनटाइड फंड का पूरा उपयोग हुआ कि नहीं
- ग्रामीण योजनाओं का बेहतर संचालन और अनुश्रणव
- टीबी, कुष्ठ, मानसिक रोगियों की पहचान के तरीके बताना
- स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ के लिए लोगों को जानकारी देना
- हेल्थ-वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करना
- पेयजल, स्वच्छता, पर्यावरण आदि से संबंधित कार्य करना



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