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सोनू गया कोटा…पीछे छूट गई गांव के बच्चों की पढ़ाई:जिस जुगाड़ के स्कूल में सोनू बच्चों को पढ़ाता था, वो अब बंद

करीब एक साल पहले सीएम नीतीश कुमार से पढ़ाई की गुहार लगाने वाला सोनू आज काफी बदल गया है। उसकी फर्राटेदार इंग्लिश बोलते हुए वीडियो भी सामने आई थी। नालंदा जिले के निमकोल गांव का रहने वाला सोनू आज कोटा में पढ़ाई कर रहा है। कोटा जाने से पहले उसने अपने गांव और पास के गांव पासवान नगर में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था।

करीब ढ़ाई साल तक पढ़ाने के बाद सोनू राजस्थान चला गया और कोटा में पढ़ाई करने लगा। अपने अच्छे भविष्य और बेहतर पढ़ाई के लिए सोनू बाहर तो चला गया, लेकिन पीछे छोड़ गया गांव के बच्चों की वो उम्मीद जिसे उसने जगाई थी।

हमारी टीम ने सोनू के गांव पहुंचकर उस कमरे को भी देखा, जहां से उसने बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत की थी। भास्कर ने पाया कि वो कमरा आज भी वैसा ही पड़ा है, जैसा पहले था। अब उस गांव में बच्चों को पढ़ाने वाला वैसा मास्टर या टीचर नहीं हैं, जो सोनू की ही तरह शिक्षा दे सके।

गांववालों को अपने बच्चों की शिक्षा के लिए जो उम्मीद की किरण दिखी थी, अब वो भी बुझ चुकी है। मजबूरी में अब इन बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ना पर रहा है, जहां शिक्षा की स्थिति पूरी तरह से चरमराई हुई है।

सोनू के गांव से पढ़िए दैनिक भास्कर की ये ग्राउंड रिपोर्ट

दो बच्चों से सोनू ने की थी पढ़ाने की शुरुआत

पासवान नगर गांव के वार्ड नंबर-2 के सदस्य धर्मवीर पासवान बताते हैं कि एक दिन सोनू बेलछी से अपने कोचिंग से लौट रहा था। तब उन्होंने सोनू को रोककर पूछा कि क्या वह उनके बच्चों को पढ़ाएंगे? सोनू ने भी हामी भर दी। फिर वह धर्मवीर के दो बच्चों को एक छोटे कमरे में पढ़ाने लगा।

धर्मवीर ने बताया कि सोनू को पढ़ाता देख वहां के लोग उसपर हंसते थे। ये बात उसे अच्छी नहीं लगती थी। उसने एक दिन धर्मवीर को कहा कि उसे कहीं और खुले में पढ़ाने की जगह दें। फिर धर्मवीर ने बाबा चौहरमल की प्रतिमा के पास उसे करकट से घेरकर एक स्कूल बनवाकर दिया। उसके बाद सोनू महादलित दलान में पढ़ाने लगा, जहां बच्चों की संख्या दो से बढ़कर 80 हो गई थी।

सोनू ने 3 साल पहले यानी 2020 में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था। मात्र 100 रुपए प्रति माह की फीस में सोनू पहले अपने गांव, फिर दूसरे गांव में भी जाकर पढ़ाने लगा। उसने करीब 1 साल तक पासवान नगर गांव में बच्चों को पढ़ाया। वह होम ट्यूशन के 200 रुपए प्रति माह लेता था। ट्यूशन से मिलने वाले पैसों से उसने एंड्रायड फोन खरीदा, ताकि वह यूट्यूब पर जानकारी हासिल कर सके।

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