अभी फिलहाल बिहार में बाहुबली नेता आनंद मोहन सत्ता के गलियारे के केंद्र में हैं। सभी सियासी पार्टियों के निगाह आनंद मोहन के राजनीतिक रणनीति पर टिकी हुई है। हालांकि सभी अपने तरफ से यह दावा कर रहे हैं कि उनकी कोशिश का नतीजा है कि आनंद मोहन की रिहाई हो रही है। भारतीय जनता पार्टी अलग आनंद मोहन से अपनी सहानुभूति रख रही है।
तो वही आनंद मोहन पर इसलिए दावा कर रही है कि सरकार उनकी है और उन्होंने उनकी रिहाई का ऑर्डर किया है। अभी तक आनन्द मोहन ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। किसी को नहीं पता कि रिहाई के बाद किस धारा के साथ राजनीति को आगे बढ़ाएंगे। जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भाजपा के दावे पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा उन्होंने मायावती का विरोध कर आया है।
ललन सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा कि आनंद मोहन की रिहाई पर अब भाजपा खुलकर आई है। पहले तो यूपी की अपनी बी टीम से विरोध करवा रही थी। बीजेपी को यह पता होना चाहिए कि नीतीश कुमार के सुशासन में आम व्यक्ति और खास व्यक्ति में कोई अंतर नहीं किया जाता। आनंद मोहन ने पूरी सजा काट ली और जो छूट किसी भी सजायाफ्ता को मिलती है वह छूट उन्हें नहीं मिल रही। क्योंकि खास लोगों के लिए नियम में प्रावधान किया हुआ था। नीतीश कुमार ने आम और खास के अंतर को समाप्त किया और एकरूपता लाई तब उनकी रिहाई का रास्ता प्रशस्त हुआ।
ललन सिंह ने आगे लिखा है कि अब भाजपाइयों के पेट में न जाने दर्द क्यों होने लगा है….! भाजपा का सिद्धांत ही है विरोधियों पर पालतू तोतों को लगाना, अपनों को बचाना और विरोधियों को फंसाना… वहीं नीतीश कुमार के सुशासन में न तो किसी को फंसाया जाता है न ही किसी को बचाया जाता है।
वहीं बीजेपी के नेता और बिहार सरकार के पूर्व कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आनंद मोहन के लिए बीजेपी का दरवाजा खुला है। आनंद मोहन पहले भी बीजेपी से जुड़े हुए थे। आनंद मोहन बीजेपी में जुड़ेंगे तो खुशी की बात होगी। आनंद मोहन सजा से ज्यादा समय तक जेल में रह चुके है। आनंद मोहन कोई पेशेवर अपराधी नहीं थे। जो लोग आरोप लगा भीड़ के नेता थे।



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