
इस बीच ख’तरे को देखकर टेम्पो चालक मौके से भाग गया। टेंपो के यात्री पहले ही उतर चुके थे। इस घ’टना के बाद ट्रेन रुक गई। तेज आवाज सुनकर उतरे यात्रियों की मदद से टेम्पो को ट्रेन के इंजन से अलग किया गया। इंजन खराब होने से ट्रेन वहीं खड़ी हो गई। जिस समय यह हा’दसा हुआ, उस समय ट्रेन में सवार यात्रियों में अ’फरा त’फरी का माहौल बन गया। यात्रियों ने बताया कि एक जो’रदार आवाज के साथ ट्रेन घट’नास्थल पर रुक गई। ट्रेन की बोगियों से जान बचाने के लिए कू’दने लगे। हालांकि मा’जरा समझ में आते ही लोग फिर ट्रेन के पास इ’क्कठा होने लगे। घ’टना की सू’चना पर स्थानीय रेल अधिकारी शफीगंज पहुंचे और ट्रेन को वैकल्पिक इंजन के सहारे नवादा लाया गया। इसके बाद ट्रेन को शंटिंग में डाल दिया गया। केजी रेलखंड पर इस घ’टना के बाद टेंपो चालक पर एफआईआर द’र्ज की जाएगी। चालक फ’रार हो गया था, इसलिए उसके टेंपो नंबर के आधार पर एफआईआर द’र्ज की जाएगी.

सुबह के ट्रेन में अपने गंतव्य तक जाने के लिए सैकड़ों यात्री सवार हुए थे। बीच रास्ते में ही ट्रेन ख’राब हो जाने से यात्रियों की काफी फ’जीहत हुई। सवारी गाड़ी के शफीगंज में फं’स जाने के बाद यात्री इस आशा में वहीं रुके रहे कि ट्रेन का इंजन ठीक होने के बाद वे आगे की यात्रा कर सकेंगे। इस बीच ट्रेन को आगे बढ़ाने ला’यक नहीं ठीक किया जा सका।केजी रेलखंड पर इस घटना के बाद दो घंटे तक ट्रेनों की आ’वाजाही ठ’प रही। कई ट्रेनें नवादा, तिलैया आदि में रुकी रहीं। सुबह आठ बजे के बाद जब क्ष’तिग्र’स्त ट्रेन को वैकल्पिक व्यवस्था कर नवादा लाया गया तो ट्रेनों की आ’वाजाही रेलखंड पर शुरू हो सकी। इस बीच उस ट्रेन पर सवार यात्रियों को बसो व छोटे वाहनों से गंतव्य तक यात्रा करनी पड़ी। 16 दिसंबर 2014 को किऊल गया रेलखंड के शफीगंज गांव के समीप मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर ट्रेन और बोलेरो की भीष’ण ट’क्कर में पांच युवकों की मौ’त हो गई थी, जबकि पांच लोग गं’भीर रूप से ज’ख्मी हो गये थे।
बोलेरे में 10 लोग सवार थे और ये शफीगंज में अपने संबंधी की बेटी की शादी में शामिल होने के बाद सुबह अपने घर लौट रहे थे। दुर्घ’टना इतनी भ’यावह थी कि ट्रेन की चपेट में आयी बोलेरो लगभग 200 मीटर तक ट्रैक पर घि’सटती चली गयी थी। ट्रेन में मौजूद मुसाफिरों और ग्रामीणों ने काफी म’शक्कत के बाद सभी घा’यलों को दुर्घ’टनाग्रस्त बोलेरो से बाहर निकाला था। आठ घंटे बाद किऊल गया रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन बाहल किया गया था। इसके बाद भी रेलवे ने इस घ’टना से कोई सबक नहीं ली।




Leave a Reply