पटना में छठ महापर्व के दौरान पर्यावरण को बचाने के लिए उपासना की गई। उपासना करने वाले पटना के यूथ हैं, जिन्होंने छठ महापर्व के दौरान गंदगी से पटे घाटों की सफाई कर एक मिसाल की हैं। पटना में लाखों लोगों ने घाटों पर सूर्य की उपासना की और इस दौरान पूजा सामग्रियों से घाटों पर गंदगी हो गई थी। हर बड़े घाट पर 100 किलो से अधिक कचरा निकला है। पटना के यूथ ने घाटों की सफाई कर कचरा नगर निगम को सौंपा है।
पटना में सामाजिक काम करने वाली यूथ की संस्था बीइंग हेल्पर के सनी सिंह का कहना है कि महापर्व पर लोग पर्यावरण को भूल जाते हैं। उपासना के दौरान यह भी संकल्प होना चाहिए कि जहां हम पूजा कर रहे हैं, वहां की सफाई भी जिम्मेदारी होगी।
सनी सिंह का कहना है कि छठ पर्व बिहार के लिए लोक आस्था का महापर्व है। इस पर्व में दूर दराज से लोग आकर उपासना में शामिल होते हैं। कोरोना काल में भी घाटों पर आस्था का सैलाब था। इस दौरान पूजा के बाद घाट पूजा सामग्रियों के कचरे से पट गए। बीइंग हेल्पर के यूथ ने घाटों की गंदगी देख यह निर्णय लिया कि छठ व्रतियों की उपासना तो पूरी हो गई अब वह टीम के साथ पर्यावरण की उपासना में लग जाएंगे।
दीघा घाट पर 100 किलो से अधिक निकला कचरा
बीइंग हेल्पर के सनी सिंह का कहना है कि वह टीम के साथ घाट पर पहुंच गए और पूरे दिन सफाई का कार्यक्रम चलाया। इस दौरान पटना के बड़े घाट दीघा में 100 किलो से अधिक पूजा सामग्री का कचरा (जिसमें प्लास्टिक के साथ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री थी) उठाया। कचरा में प्लास्टिक, शीशा और प्लास्टिक की बोतलों के साथ ऐसे सामान फेंके गए थे, जो गंगा में मिलकर उसे प्रदूषित करने का काम करते। टीम के सदस्यों ने कचरा को चुना और फिर उसे अलग अलग लगभग 22 बड़े बैग में इकट्ठा किया। फिर कचरे को नगर निगम को सौंप दिया गया है।

संस्था से जुड़े यूथ का कहना है कि पर्यावरण की उपासना भी जरूरी है। कोरोना काल में प्रकृति ने अपना रंग दिखा था। इस कारण से स्वच्छ हवा को लेकर हर किसी को गंभीर होना चाहिए और पूजा पाठ के साथ हर श्रद्धालुओं को पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर भी ध्यान देना चाहिए।
हर घाट पर 100 किलो से अधिक कचरा
बीइंग हेल्पर के यूथ का कहना है कि जितने भी बड़े स्थायी घाट हैं, वहां से 100 किलो से अधिक कचरा निकला है। इसमें प्लास्टिक की मात्रा अधिक रही है, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक है। यह कचरा गंगा में मिलकर गंगा को प्रदूषित करने का काम करता। यूथ का कहना है कि वह घाटों की सफाई से लोगों को संदेश देना चाहते हैं कि पर्यावरण की उपासना को लेकर भी लोग गंभीर रहें। पूजा के साथ जीवन के लिए सफाई बहुत जरूरी हैं।



Leave a Reply