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आशा ही टीबी उन्मूलन की प्रथम और अंतिम आशा: डॉ रावत

आशा ही टीबी उन्मूलन की प्रथम और अंतिम आशा: डॉ रावत

  • आशा को करनी है टीबी मरीजों की खोज और उपचार
  • हर स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध है बलगम जांच की सुविधा

वैशाली, 11 जनवरी।
यक्ष्मा के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्येश्य से हाजीपुर प्रखंड के बेरई के सामुदायिक भवन के प्रांगण में सोमवार को निक्षय दिवस का आयोजन किया गया। जिसका विधिवत उद्घाटन सोमवार को डब्लूएचओ के सलाहकार डॉ उमेश त्रिपाठी, डॉ सौरभ, एमओआईसी डॉ रंजीत कुमार , तथा जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ शिव कुमार रावत ने संयुक्त रूप से किया। मौके पर एमओआईसी तथा भाषा के प्रदेश महासचिव डॉ रंजीत ने कहा कि निक्षय दिवस को प्रत्येक महीने मनाने का मकसद गांवों तक टीबी की पहचान और उसका उन्मूलन करना है। वहीं डब्लूएचओ के डॉ उमेश त्रिपाठी ने कहा कि इस दिवस का मकसद टीबी मुक्त भारत के लिए प्रयास करने से भी सम्बंधित है। हम जानते हैं कि गांवों में ग्रामीण चिकित्सक मुख्य भूमिका निभाते हैं। यह उनकी जिम्मेदारी है कि टीबी के मरीजों की पहचान कर उसका मार्गदर्शन करें। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित भी किया गया है। हम जानते हैं कि प्रत्येक तीसरे व्यक्ति में टीबी का वायरस है। पंचायत के स्तर से अगर सरपंच कोशिश करें, जन चेतना लाएं तो टीबी का उन्मूलन सम्भव है। वहीं एन टी ई पी के अजीम ने कहा कि हर जगह टीबी के लक्षण और उपायों की जानकारी दीवाल लेखन कर दी जाए तो बहुत फायदेमंद साबित होगा। डॉ सौरव और डॉ रावत ने टीबी के प्रति जागरूकता को अमलीजामा पहनाने की भी बात की| डॉ रावत ने कहा कि हमारी आशा ही टीबी उन्मूलन की प्रथम और अंतिम आशा है। हमें ज्यादा से ज्यादा टीबी के प्रति जागरूक होना है ताकि 2025 तक टीबी को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके। गांव -गांव में इस कैंप के लगाने का मकसद भी यही है कि यह जानकारी उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें सच में इनकी जरूरत है। मौके पर डॉ शिवकुमार रावत ने कहा कि टीबी के इलाज में मरीजों का कुछ खर्च नहीं होता बल्कि उनके खाते में पूरे कोर्स के दौरान पांच सौ रुपये प्रोत्साहन के लिए मिलते हैं जिससे वह उचित पोषाहार ले सकें।
टीबी के बलगम की जांच सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों तक उपलब्ध -हाजीपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रंजीत कुमार ने कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए सभी आशा को टीबी के लक्षणों के बारे में बताया । डॉ कुमार ने कहा कि टीबी के बलगम की जांच सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों तक उपलब्ध है। निक्षय दिवस के अवसर पर मेडिकल टीम का गठन किया गया जिन्होंने बेरई के 14 वार्डों में 34 जगहों से बलगम के नमूने लिए। मौके पर सीडीओ डॉ शिव कुमार रावत, डब्लूएचओ के राज्य स्तरीय सलाहकार डॉ यूसी त्रिपाठी, डॉ सौरभ, एन टी ई पी की बुशरा अजीम, एमओआईसी डॉ रंजीत कुमार, सरपंच डॉ रमाकांत पासवान , सुरेंद्र पासवान प्रमोद कुमार सहनी समेत अन्य लोग मौजूद थे।

टीबी के लक्षण
-टीबी का एक प्रमुख लक्षण है खांसी। अगर आपको तीन हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी हो तो इसे नजरअंदाज न करें।

-खांसी में खून आना

-सीने में दर्द या सांस लेने और खांसने में दर्द होना

-लगातार वजन कम होना

-चक्कर आना

-रात में पसीना आना

-ठंड लगना

-भूख न लगना

टीबी के कारण-
टीबी एक संक्रामक रोग है जो हवा और सांस से फैलता है। जब कोई टीबी का मरीज खांसता या छींकता है तो उससे निकलने वाले कणों के संपर्क में आने से टीबी हो सकता है। इसके अलावा कुछ और रिस्क फैक्टर्स भी हैं जो आपमें टीबी की संभावना और बढ़ा देती हैं।

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