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जिस सीट पर पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय को नहीं मिला था टिकट, वहां हारा NDA

नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर जेडीयू ज्वाइन करने वाले डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय (Gupteshwar Pandey) के चुनाव लड़ने को लेकर काफी चर्चाएं हुई थीं. तब कहा जा रहा था कि गुप्तेश्वर पांडेय को जेडीयू बक्सर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतार सकती है. लेकिन बाद में जब सीटों का बंटवारा हुआ तो यह सीट बीजेपी के खाते में आ गई और गुप्तेश्वर पांडेय को टिकट नहीं मिला. बीजेपी ने इस सीट पर बिहार पुलिस में हवलदार रहे और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता परशुराम चतुर्वेदी को चुनाव मैदान में उतारा. उनकी टक्कर हुई कांग्रेस के सिटिंग विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी से. अब जानकारी आ रही है कि परशुराम चतुर्वेदी चुनाव हार गए हैं. हालांकि जीत का अंतर बहुत बड़ा नहीं हैं. मुन्ना तिवारी करीब चार हजार वोटों से चुनाव जीत गए हैं.

1994 में परशुराम चतुर्वेदी ने छोड़ी थी पुलिस की नौकरी

परशुराम चतुर्वेदी शुरू से ही नेता बनना चाहते थे और उनको पुलिस विभाग की नौकरी रास नहीं आ रही थी. जब उनका जुड़ाव बीजेपी से हुआ तो उन्होंने अपनी इस सरकारी नौकरी का त्याग कर दिया और सक्रिय राजनीति में आ गए. वो बिहार पुलिस में हवलदार रैंक पर कार्यरत थे और 26 साल पहले उन्होंने नौकरी छोड़ दी.

बक्सर में बीजेपी के बड़े और पुराने नेताओं में से एक हैं जिनको पार्टी ने टिकट उनके करियर, समर्पण और काम को देखते हुए दिया था. मूल रूप से बक्सर से सटे महदह के रहने वाले परशुराम बक्सर से बीजेपी के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं और 29 साल पहले यानी सन 1991 से पार्टी में सक्रिय कार्यकर्ता के तौर पर लगातार जुड़े हुए हैं. परशुराम चतुर्वेदी की पहचान स्वंयसेवी के तौर पर होती है.

गुप्तेश्वर पांडेय के नाम को लेकर थी काफी चर्चा

इस सीट से जिन चेहरों को लेकर सबसे अधिक कयास लग रहे थे, उनमें पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय सबसे ऊपर थे. जेडीयू के इस नेता को वीआरएस लेकर राजनीति में आने के बाद भी इस बार बक्सर ही नहीं, बल्कि अभी तक बिहार की किसी भी विधानसभा सीट से पार्टी का प्रत्याशी नहीं घोषित किया गया.

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