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दवाओं के साथ पोषाहार के उपयोग से खत्म होगी टीबी- सीएस

दवाओं के साथ पोषाहार के उपयोग से खत्म होगी टीबी- सीएस

  • पोषण पोटली बढ़ाएगी टीबी मरीजों की रोगप्रतिरोधक क्षमता
  • निक्षय मित्र बन चिकित्सकों ने दिखाई तत्परता, छः महीने तक उपलब्ध कराएंगे पौष्टिक आहार

बेतिया, 06 जून। टीबी के इलाज में दवाओं के साथ पोषाहार का उपयोग बेहद जरूरी होता है। टीबी के कारण मरीजों के शरीर में दिन- प्रतिदिन कमजोरी एवं वजन में भी कमी आ जाती है। दवाओं के सही सेवन व इलाज से यह ठीक हो जाती है। मरीजों को पूर्णतः ठीक होने के लिए दवाओं के सेवन के साथ हीं पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। ताकि टीबी पूरी तरह से ठीक हो सके। ये बातें जिले के सिविल सर्जन डॉ श्रीकांत दुबे ने बताई। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के द्वारा निक्षय मित्र बनने सम्बंधित अपील पर पहल करते हुए जिले के चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी, समाजसेवी अब टीबी मरीजों के सहयोग को आगे आ रहे और निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को सहयोग कर रहे हैं।

निक्षय मित्र बन चिकित्सकों ने दिखाई तत्परता-

जिले के चनपटिया पीएचसी प्रभारी डॉ प्रदीप कुमार के नेतृत्व में 04 व्यक्ति निक्षय मित्र बन 7 टीबी मरीजों को गोद लेते हुए तत्परता दिखाई है। प्रभारी डॉ प्रदीप कुमार ने 02, डॉ कुमार रितेश रंजन ने 02, डॉ शशांक शेखर02 और लैब टेक्नीशियन राजेश कुमार ने 01 टीबी मरीज को गोद लेकर छः महीने के लिए दाल, तेल, चना, मूंग, सोयाबीन, राजमा इत्यादि उपलब्ध कराया है। मौके पर चनपटिया पीएचसी प्रभारी डॉ प्रदीप कुमार ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर टीबी मरीजों को पोषण का लाभ पहुंचाकर उन्हें सुरक्षित करना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने अनुरोध किया कि टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार देने हेतु आगे आएं औऱ उन्हें गोद लेकर 6 माह तक उनके लिए पौष्टिक आहार में भूना चना, सत्तू, सोयाबिन, अंडे, गुड़, मूंगफली, बिस्किट आदि खाद्य पदार्थो की पैकेट सूची के अनुसार वितरण करें।
मौके पर डॉ चेतन जयसवाल, चिकित्सा पदाधिकारी बेतिया,
एसटीएस, राकेश कुमार वर्मा, राहुल कुमार सिंह, जिला यक्ष्मा केंद्र में कार्यरत सूर्य नारायण साह सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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