MUZAFFARPUR

वाह रे सरकारी सिस्टम! 65 हजार लेकर दिव्यांग को नगर निगम में बना दिया गार्ड, देखते रहे अधिकारी

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर में नगर निगम में मानव बल आपूर्ति का ठेका मिलने के बाद आउटसोर्सिंग एजेंसी (मेसर्स गोस्वामी सिक्यूरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड) ने अवैध कमाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। गार्ड व सफाईकर्मी का काम दिलाने के बहाने मोटी राशि उगाही की।

इस मामले में नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आलम यह कि प्रावधानों को ठेंगा दिखाते हुए 65 हजार लेकर एक दिव्यांग को गार्ड बना दिया। उसके एक पैर में समस्या के कारण चलने में थोड़ी परेशानी होती है। फिलहाल वह निगम के एक अंचल कार्यालय में गार्ड की ड्यूटी कर रहा है।

एग्रीमेंट की शर्तों के तहत निगम में काम के लिए भेजने को मानव बल से रकम नहीं लेना है। हद तो यह कि अवैध वसूली को लेकर मानव बल को प्रताड़ित करने के साथ ही धमकाकर खामोश रहने पर विवश कर दिया। वेतन-मजदूरी के अलावा ईपीएफ व अन्य राशि की भी सही जानकारी नहीं दी गई। हर गार्ड को एक सेट वर्दी देने के बदले 5600 रुपये वसूले गए। वर्दी की कीमत अधिकतम दो से ढाई हजार के बीच ही है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि निगम के अधिकारी इस खेला को देखते रहे पर किसी ने कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। मामला सामने आने के बाद जांच और कार्रवाई की बात कही जा रही है।

नौ साल पहले भी हुआ था ईपीएफ व ईएसआईसी घोटाला

नौ साल पहले भी निगम में हुए मानव बल के ईपीएफ व ईएसआईसी घोटाले में गोस्वामी एजेंसी का नाम सामने आया था। निगम के तत्कालीन प्रधान सहायक अशोक कुमार सिंह के मुताबिक 2017 में संबंधित एजेंसी ने निगम को चालक की आपूर्ति की थी। उन चालकों के ईपीएफ व ईएसआईसी की राशि नहीं जमा कराई गई थी।

 

2014 में सारण में दर्ज हुआ था मामला

12 साल पहले सारण के दरियापुर थाने में सिक्यूरिटी एजेंसी पर केस हुआ था। हालांकि, इस जानकारी को छिपाकर लाइसेंस हासिल करने को लेकर गृह विभाग ने नवंबर 2025 में एजेंसी के लाइसेंस को निरस्त कर दिया था।

दो एजेंसियों पर गिर सकती है गाज

वित्तीय अनियमितता व अन्य गड़बड़ी को लेकर दो आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर गाज गिर सकती है। वेतन भुगतान में देरी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

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