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पुल गिरा तो सरकार ने अफसरशाही पर गिराई गाज, निर्माणाधीन ब्रिज गिरने के मामले में तीन इंजीनियर सस्पेंड

गोपालगंज: तीन इंजीनियर्स के निलंबित होने के बाद बिहार की अफसरशाही में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है। गोपालगंज जिले के सिधवलिया प्रखंड स्थित सलेमपुर घाट पर घोघरी नदी पर बन रहा निर्माणाधीन पुल अचानक भरभराकर गिर पड़ा। इस वाकये ने न सिर्फ अवाम को सकते में डाल दिया, बल्कि हुकूमत को भी सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

यह पुल इलाके के लिए लाइफलाइन साबित होने वाला था। दर्जनों गांवों के लोगों को इससे राहत मिलने की उम्मीद थी, मगर तामीरात के दौरान ही ढांचा ध्वस्त हो जाने से निर्माण की साख, मियारी गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। गनीमत रही कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, वरना यह हादसा संगीन त्रासदी बन सकता था।

वाकये की खबर मिलते ही ग्रामीण कार्य विभाग ने फौरन संज्ञान लिया और आला-स्तरीय तहकीकात टीम तैनात कर दी। शुरुआती जांच में तकनीकी मानकों की अनदेखी, मॉनिटरिंग में कोताही और संभावित भ्रष्टाचार की बू सामने आई। नतीजतन तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता को फौरन प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विभागीय फरमान में साफ कहा गया है कि गुणवत्ता नियंत्रण में नाकामी और पर्यवेक्षण में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सूत्रों की मानें तो निर्माण में लगी संवेदक एजेंसी पर भी शिकंजा कसना तय है। उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया पर भी गौर किया जा रहा है। अवाम के टैक्स से बनने वाले इस पुल के गिरने से सरकारी खजाने पर चोट तो लगी ही, साथ ही जनसंपर्क मार्ग भी बाधित हो गया है।इस पूरे प्रकरण को लेकर ग्रामीणों में गुस्सा है। वे न्यायिक जांच और तय मियाद में मजबूत पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं।

हालिया महीनों में राज्य के अलग-अलग जिलों में पुलों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही हिदायत दे चुके हैं कि निर्माण में लापरवाही या बदनीयती कतई बर्दाश्त नहीं होगी। गोपालगंज की यह कार्रवाई एक सख्त पैगाम है भ्रष्टाचार और तकनीकी शिथिलता पर अब सीधी कार्रवाई तय है।

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