दरभंगा: अलीनगर विधानसभा क्षेत्र में बुधवार को आयोजित एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान हंगामा मच गया. मंच पर मौजूद उत्तर प्रदेश के बलिया से भाजपा विधायक केतकी सिंह ने मिथिला की पहचान और गौरव का प्रतीक ‘पाग’ को फेंक दिया. इस घटना से मंच और मैदान में मौजूद कार्यकर्ता और स्थानीय लोग नाराज हो उठे. लोगों ने इसे मिथिला की संस्कृति और अस्मिता का अपमान बताया.

विधायक का विवादित बयान
कार्यक्रम में अतिथियों का पारंपरिक रूप से ‘पाग’ पहनाकर स्वागत किया जा रहा था. विधायक केतकी सिंह ने ‘पाग’ उठाते हुए पूछा, “ये पाग क्या है?” दर्शकों ने जवाब दिया, “यह मिथिला का सम्मान है.” इस पर विधायक ने ‘पाग’ फेंकते हुए कहा, “नहीं, ये मिथिला का सम्मान नहीं… मैथिली ठाकुर मिथिला का सम्मान हैं.” इस बयान और व्यवहार से कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया.

जन सुराज प्रत्याशी ने की माफी की मांग
दरभंगा शहरी विधानसभा से जन सुराज के प्रत्याशी राकेश कुमार मिश्रा ने विधायक के इस कृत्य पर नाराजगी जताते हुए कहा, “पाग केवल एक वस्त्र नहीं, यह मिथिला की अस्मिता और परंपरा का प्रतीक है. इसका अपमान पूरे मैथिल समाज का अपमान है. इससे मिथिला के लोग काफी आहत हैं. भाजपा नेतृत्व को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और मिथिला की संस्कृति के सम्मान में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए.”

मिथिला का सम्मान का प्रतीक ‘पाग’ आज विदेशों तक में लोगों को सम्मानित करने के लिए इस्तेमाल हो रहा है. ‘पाग’ धारण करने से मिथिला की संपूर्णता का बोध होता है. इसके अलावा, मिथिला पेंटिंग भी सांस्कृतिक धरोहर है, जो प्रोत्साहन मिलने के बाद विदेशों में प्रसिद्धि पा चुकी है. इससे युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं. स्थानीय लोगों ने कहा कि इस घटना ने मिथिला की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और बीजेपी को तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए.

अलीनगर विधानसभा क्षेत्र
दरभंगा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत अलीनगर विधानसभा क्षेत्र आता है. 2020 विधानसभा चुनाव में विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के मिश्री लाल यादव ने जीत हासिल की. उन्हें 61,082 वोट मिले, जबकि महागठबंधन (आरजेडी) के विनोद मिश्रा को 57,981 वोट मिले. अंतर मात्र 3,101 वोटों का था.

मतदान प्रतिशत 57.4% रहा. VIP उस समय NDA गठबंधन का हिस्सा था. यहां पहले चरण में 6 नवंबर को मतदान होना है. यहां से महागठबंधन ने RJD ने विनोद मिश्रा को फिर से टिकट दिया है. वे 2020 में हार चुके हैं, लेकिन मुस्लिम-यादव समीकरण के कारण मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं.


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