सीतामढ़ी: बिहार विधानसभा चुनाव में बागी उम्मीदवारों की बाढ़ आ गई है. 2020 में परिहार सीट से आरजेडी की उम्मीदवार रही रितु जायसवाल इस बार बेटिकट हो गईं है. लिहाजा उन्होंने निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर ताल ठोंक दिया है.

सोमवार को नामांकन के आखिरी दिन पर्चा दाखिल किया. इस दौरान वह बेहद भावुक दिखीं. वहीं लोगों को संबोधित करते हुए फूट-फूटकर रो पड़ीं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ राजनीतिक साजिश हुई है.

रितु जायसवाल ने भरा पर्चा
सोमवार को दूसरे फेज के नामांकन के अंतिम दिन पूर्व मुखिया रितु जायसवाल ने निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर परिहार विधानसभा सीट से नामांकन किया है. उन्होंने एक दिन पहले से स्पष्ट कर दिया था कि वह हर हाल में चुनाव लड़ेंगे. हालांकि उनको आरजेडी ने बेलसंड से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था लेकिन वह परिहार से लड़ने पर अड़ गईं, जिस वजह से पार्टी ने उनको बेटिकट कर दिया.

फूट-फूटकर रो पड़ीं रितु जायसवाल
नामांकन के बाद लोगों को संबोधित करते हुए रितु जायसवाल काफी भावुक दिखीं. अपने भाषण के दौरान वह फूट-फूटकर रोने लगीं. उन्होंने कहा, ‘मुझे बोला गया कि बेलसंड चले जाइये चुनाव लड़ने. मैं क्यों जाऊं बेलसंड चुनाव लड़ने. मुझे कहा गया नोमिनेशन डालकर घर में सो जाइयेगा तो भी बेलसंड विधानसभा निकल जाएगा.

मैं पेपर दे आई 10 सर्कुलर रोड में लेकिन रातभर में सो नहीं पाई कि मैं अपनी आत्मा से जिस्म को अलगकर मर जाऊंगी, मैं नहीं रह पाऊंगी परिहार के बिना. इसलिए निर्दलीय ही मैदान में उतर आई हूं, अब आपलोगों को फैसला लेना है.’

आरजेडी कार्यकर्ताओं के नाम संदेश
रितु जायसवाल ने आरजेडी कार्यकर्ताओं के नाम संदेश जारी किया है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में जब राष्ट्रीय जनता दल ने मुझे परिहार से टिकट देकर दल में शामिल कराया, उससे पहले ही मैं अपने सामाजिक कार्यों के लिए राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार (2019) और ‘Champions of Change’ (2018) जैसे राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुकी थी. इसलिए यह कहना पूरी तरह गलत है कि मैं एक मामूली मुखिया थी और राजद ने मुझे पहचान दिलाई थी. सच्चाई यह है कि मेरी पहचान मेरे काम से बनी थी.


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