मुजफ्फरपुर: त्योहारों की रौनक, कला की खुशबू और भावनाओं की गहराई — इन सबका संगम देखने को मिला लिच्छीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान के तहत आयोजित अनहद शुभ श्री जन संवाद में।


इस बार चर्चा में रहा एक अद्भुत सृजन — “पति की तस्वीर वाली साड़ी”, जो पहली बार भारतीय परिधान कला के इतिहास में साकार हुआ।

इस अनुपम रचना के जनक हैं लीचीपुरम आर्ट के प्रसिद्ध कलाकार सुजीत श्रीवास्तव, जिन्होंने अपने ब्रश के जादू से लीचीपुरम के संस्थापक एवं पर्यावरण प्रेमी सुरेश गुप्ता जी की छवि को साड़ी के आंचल पर जीवंत किया। यह साड़ी न केवल परिधान है, बल्कि नारी भावनाओं, श्रद्धा और प्रेम का सजीव प्रतीक है।

मोना जी के लिए सृजित इस “डिवाइन लीची सुपर आर्ट साड़ी” को मंच पर धारण किया श्वेता श्रीवास्तव ने। जब उन्होंने इसे पहनकर मंच पर रैंप वॉक किया, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। दर्शकों ने महसूस किया कि यह केवल कला नहीं — बल्कि एक नए युग की सांस्कृतिक जागृति की शुरुआत है।

यह पहल नारी के समर्पण और भारतीय संस्कृति के गौरव की मिसाल बन गई है।
3 जून 2025 से पर्यावरणविद सुरेश गुप्ता द्वारा शुरू किए गए लीचीपुरम अभियान और लीचीपुरम आर्ट ने इस रचना के माध्यम से न केवल बिहार की मिट्टी की खुशबू को जीवंत किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी एक नई पहचान गढ़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है।




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