मुजफ्फरपुर: शाही लीची के लिए विश्व प्रसिद्ध मुजफ्फरपुर आज एक गहरी चिंता का विषय बन गया है। यहाँ 80% से अधिक लीची के वृक्षों का कटाव हुआ है।


जिससे न केवल इसकी कृषि अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है, बल्कि यह शहर पर्यावरणीय संकट और सांस्कृतिक अस्मिता के खतरे का भी सामना कर रहा है। इन्हीं चिंताओं के बीच “लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान” की शुरुआत की गई है।


इसी क्रम में जिले के MIT इंजीनियरिंग कॉलेज अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मुख्य अतिथि के रूप में “जल पंचायत” कार्यक्रम में भाग लिया।


इस अवसर पर उन्हें अभियान के संस्थापक पर्यावरण विद् सुरेश गुप्ता एवं प्रवक्ता मुस्कान केसरी द्वारा “डिवाइन लीचीपुरम आर्ट” के अंतर्गत “मीठा मुस्कुराइए, आप लीचीपुरम में हैं” स्लोगन से सजे शॉल, लीची कला रूमाल आदि भेंट कर सम्मानित किया गया। इस लीची आर्ट को तैयार श्वेता श्रीवास्तव द्वारा किया गया था।


महामहिम ने पूरे जिज्ञासु भाव से अभियान की विस्तृत जानकारी ली और भविष्य में लीचीपुरम अभियान पर एक विशेष परिचर्चा आयोजित करने की इच्छा व्यक्त की।

अभियान के उद्देश्य और गतिविधियाँ
3 जून 2025 से शुरू हुए इस अभियान में कई बहुआयामी गतिविधियाँ , जनसंपर्क आयोजित की जा रही हैं।


- लीची वृक्षारोपण और संरक्षण
- कविता, साहित्य, मेहंदी एवं कला प्रतियोगिताएँ
- डिवाइन लीचीपुरम आर्ट – स्थानीय पहचान को सांस्कृतिक कलाओं के माध्यम से प्रदर्शित करना
- “मीठा मुस्कुराइए”– शहर को सकारात्मकता और पहचान से जोड़ने वाला अभियान
इस प्रयास के माध्यम से मुजफ्फरपुर को देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची से बाहर लाकर, एक बार फिर पर्यावरण और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनाने का प्रयास हो रहा है।



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