पटना: काफी मंथन के बाद आखिरकार रविवार को बिहार एनडीए में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हो गया. जेडीयू और बीजेपी 101-101, चिराग पासवान (LJPR) को 29 सीट, जीतन राम मांझी (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा (RLM) को 6-6 सीट दी गई है. सीट बंटवारे पर केंद्रीय मंत्री व हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी ने नाराजगी और दुख जताया है.

‘मन में दुख’- जीतन राम मांझी
जीतन राम मांझी ने कहा कि हम जिस जाति से आते हैं, कुछ भी कठिनाई होती है तो उसमें जीना सीखा है. दो लोकसभा की सीट और एक राज्यसभा का सीट देने की बात पहले भी कही गई थी. लेकिन एक लोकसभा का सीट मिला था. हम संतुष्ट हुए और कहीं कुछ नहीं बोले. विधानसभा चुनाव में 15 की मांग थी लेकिन उनलोगों ने 6 सीट दी है. मन में दुख जरूर है लेकिन हम NDA के निर्णय के खिलाफ में नहीं हैं, संतुष्ट हैं.

नाराज हैं जीतन राम मांझी नाराज?
एनडीए के सीट शेयरिंग में केंद्रीय मंत्री व हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी को 6 सीटें मिलीं हैं. इससे जीतन राम मांझी नाराज हैं. सीट शेयरिंग के बाद उन्होंने कहा कि , NDA को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है”. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि, ”मैं अंतिम सांस तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हूं.”

जीतन राम के खाते में ये सीटें
सूत्रों की मानें तो मांझी को एनडीए ने जो सीटें दी हैं, उनमें सिकंदरा, कुटुंबा, बाराचट्टी, इमामगंज, टेकारी, अतरी शामिल हैं. इन इलाकों में मांझी का प्रभाव माना जाता है.

जीतन राम मांझी की उम्मीदों पर फिरा पानी: जीतनराम मांझी ने इससे पहले 40 सीटों की मांग की थी. इसके बाद 20 सीटें, फिर 15 सीटें पर चर्चा हुई. लेकिन रविवार को सीट शेयरिंग में उन्हें सिर्फ 6 सीटें मिलीं. ऐसे में 2020 बिहार विधानसभा चुनाव से भी 1 सीट कम उनके खाते में आई. मांझी की अहमियत लगातार कम हो रही है. क्योंकि 2015 में 21 सीटें मिली थीं. 2020 में 7 सीटें, जबकि इस बार हम को सिर्फ 6 सीटें मिलीं.

पार्टी की मान्यता चाहते हैं मांझी
जीतन राम मांझी की हम को बिहार विधानसभा में मान्यता प्राप्त पार्टी के तौर पर कम से कम 8 सीटों पर जीत चाहिए. ऐसे में मांझी कई बार कह चुके थे कि आठ सीटों पर जीत के लिए कम से कम हमें 20 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना होगा. हालांकि बाद में उन्होंने इसे घटाकर 15 कर दी थी, लेकिन एनडीए में उनकी मांगों को साइड लाइन कर दिया गया.



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