MUZAFFARPUR

आरा नगर निगम के दावे रह गए धरे – मुख्य सड़क पर दो फीट से ज़्यादा पानी

आरा: बिहार के आरा नगर निगम की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर निगम बनने के बीस साल बाद भी शहरवासियों को वही पुराने हालात झेलने पड़ रहे हैं । जलजमाव, टूटी सड़कें और प्रशासन की बेरुख़ी। ताज़ा तस्वीरें आरा–बक्सर मुख्य मार्ग के चंदवा मोड़ के समीप की हैं, जहाँ मुख्य सड़क पर दो से तीन फीट तक पानी जमा है।

यह सड़क न सिर्फ़ शहर में प्रवेश का मुख्य मार्ग है, बल्कि हर दिन हजारों लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। लेकिन फिलहाल यह सड़क किसी तालाब जैसी दिख रही है। पानी में गड्ढे इतने गहरे हैं कि वाहन चालक और पैदल राहगीर दोनों जान जोखिम में डालकर रास्ता पार करने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले कई दिनों से यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन नगर निगम प्रशासन पूरी तरह मौन है। न तो जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था की गई, न ही सड़क की मरम्मत की दिशा में कोई पहल। शहरवासी कहते हैं — “नगर निगम के अफसर और जनप्रतिनिधि इसी रास्ते से रोज़ गुजरते हैं, मगर शायद उन्हें जनता की तकलीफ़ दिखती नहीं।”

जनता का आरोप है कि नगर निगम ने हर बार स्मार्ट सिटी और क्लीन सिटी का दावा किया, मगर ज़मीनी सच्चाई इससे कोसों दूर है। मुख्य मार्ग पर भरे गंदे पानी ने न केवल यातायात व्यवस्था को चरमराया है, बल्कि आसपास के दुकानदारों और मकान मालिकों के लिए भी बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। कई दुकानों और मकानों में पानी घुस चुका है।

शहरवासियों का कहना है कि बरसात खत्म हुए हफ़्तों बीत चुके हैं, फिर भी नालों की सफाई नहीं हुई। इस लापरवाही ने निगम की कार्यसंस्कृति पर गहरा सवाल खड़ा किया है। “जनप्रतिनिधियों के कानों में तेल है, और अफ़सरों की आँखों पर पट्टी बंधी है,”यही तंज़ कस रहे हैं लोग।

अब देखना यह है कि नगर निगम के अधिकारी इस जनपीड़ा से कब जागते हैं और कब तक शहरवासी इस प्रशासनिक सुस्ती की सज़ा भुगतते रहेंगे।

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