मुजफ्फरपुर: आगामी बिहार विधान परिषद के तिरहुत स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक सूची तैयार करने की प्रक्रिया को सुचारु एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से समाहरणालय सभागार, मुजफ्फरपुर में प्रतिनियुक्त अधिकारियों एवं कर्मियों का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में सभी सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी एवं पदाभिहित पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर उपस्थित रहे। वहीं सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी अपने अपने कार्यालय से VC के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन अवर निर्वाचन पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर पूर्वी श्री राजू कुमार एवं अवर निर्वाचन पदाधिकारी पश्चिमी सुश्री सृष्टि प्रिया के द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर सभागार में नगर आयुक्त मुजफ्फरपुर; उप विकास आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी एवं पश्चिमी भी उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान अधिकारियों को निर्वाचक सूची तैयार करने से जुड़े प्रत्येक बिंदु पर विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। साथ ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों को रेखांकित करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि निर्वाचक सूची का निर्माण लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है और इस कार्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही अस्वीकार्य होगी।

पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर विशेष बल
प्रशिक्षण सत्र में अवगत कराया गया कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मूल दस्तावेज है। इसे त्रुटिरहित , पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने तथा आयोग के दिशानिर्देश का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके लिए प्रत्येक आवेदन-पत्र की जांच पूर्ण निष्पक्षता और सावधानी से की जाये। प्रशिक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपायों पर विशेष बल दिया गया।

स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचकों की पात्रता
प्रशिक्षण में स्पष्ट किया गया कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में नाम दर्ज कराने हेतु अभ्यर्थी के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक या समकक्ष डिग्री होनी अनिवार्य है। इसके लिए अभ्यर्थी को फॉर्म-18 भरना होगा। इसी प्रकार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नामांकन के लिए अभ्यर्थी को किसी मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान में कम से कम तीन वर्ष तक अध्यापन का अनुभव होना आवश्यक है। इस हेतु आवेदन फॉर्म-19 पर स्वीकार किया जाएगा।

आवेदन की जांच और सत्यापन प्रक्रिया
अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया कि आवेदन प्राप्त होने के बाद उसकी प्रारंभिक जांच की जाए। इसमें शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, नियुक्ति पत्र, अनुभव प्रमाण-पत्र, पहचान-पत्र और निवास संबंधी अभिलेखों का सत्यापन शामिल होगा। यदि किसी अभ्यर्थी के दस्तावेज संदेहास्पद प्रतीत हों, तो उन्हें संबंधित विभाग से क्रॉस-वेरिफिकेशन कराया जा सकता है।

समय-सीमा और कार्यप्रणाली
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुसार ही संपूर्ण प्रक्रिया को पूर्ण करने पर जोर दिया गया। आवेदन प्राप्त करने, उसकी जांच करने, दावे-आपत्तियां दर्ज करने तथा अंतिम निर्वाचक सूची प्रकाशित करने की प्रत्येक चरणबद्ध प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना सभी प्रतिनियुक्त अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।

तकनीकी सहयोग एवं डिजिटलीकरण
प्रशिक्षण में बताया गया कि निर्वाचक सूची तैयार करने में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। सभी अभिलेखों को डिजिटाइज कर सुरक्षित रखने की व्यवस्था होगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर उपयोग किया जा सके। अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया कि वे कैसे ऑनलाइन पोर्टल पर सूचनाएं दर्ज करेंगे और सत्यापन रिपोर्ट अपलोड करेंगे।




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