पटना : मुख्यमंत्री रोजगार योजना की आज से शुरुआत हो गई है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 75 लाख महिलाओं के खाते में 7500 हजार करोड़ की राशि ट्रांसफर कर दिया है. मुख्यमंत्री आवास से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस कार्यक्रम में शामिल हुए.
75 लाख खातों में भेजी गई राशि
वहीं इस कार्यक्रम को लाइव देखने के लिए जदयू कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और पार्टी के तमाम नेता जुटे थे. प्रधानमंत्री के 75 लाख महिलाओं के खाते में राशि भेजने के बाद जदयू कार्यालय में जश्न शुरू हो गया. जदयू के नेता एक दूसरे को मिठाई खिलाने लगे तो वहीं पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से जमकर आतिशबाजी भी होने लगी.

दिवाली से पहले मनी दीपावली
वीर चंद पथ का इलाका पटाखों से आधे घंटे तक गूंजता रहा. जदयू नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि महिलाओं के बूते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2025 में 225 से अधिक सीट जीतेंगे. मुख्यमंत्री रोजगार योजना शुरू होने से महिलाओं में खुशी है और पार्टी के नेता अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला है. मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने इसकी शुरुआत कर दी है.
NDA नेता हैं गदगद
दरअसल, मुख्यमंत्री रोजगार योजना के लिए एक करोड़ से अधिक महिलाओं ने आवेदन दिया है. उसी में से 75 लाख महिलाओं को आज 10000 की राशि प्रत्येक को भेजी गई है. मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा कर दी है कि 3 अक्टूबर को फिर से राशि भेजी जाएगी. कुल मिलाकर मुख्यमंत्री रोजगार योजना शुरू होने के बाद से एनडीए नेता इसे भुनाने में लग गए हैं.

क्या है योजना और किसको मिलेगा लाभ?
मुख्यमंत्री रोजगार योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को जीविका से जुड़ना अनिवार्य है. राज्यभर में वर्तमान में करीब 11 लाख स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं. जीविका दीदियों की संख्या 1 करोड़ 40 लाख से अधिक है.
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के लिए इन्हीं में से अभी तक ग्रामीण इलाकों की 1 करोड़ 9 लाख 82 हजार महिलाओं ने आवेदन किया है. जिसमें से 75 लाख महिलाओं को आज राशि भेज दी गई है. 10 हजार की राशि से स्वरोजगार शुरू कर महिलाएं स्वालंबी बन सकेंगी. 6 महीना में आंकलन किया जाएगा और उसके बाद सरकार 2 लाख की राशि व्यवसाय को आगे बढ़ाने में और देगी.
महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने, छोटे-मोटे व्यवसाय स्थापित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. इस योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता से महिलाएं खेती, पशुपालन, हस्तशिल्प, सिलाई, बुनाई, और अन्य लघु उद्यमों में निवेश कर सकेंगी.




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