पटना: बिहार की नीतीश सरकार ने दुर्गा पूजा के अवसर पर सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देने का फैसला लिया है. सरकार ने सितंबर महीने की सैलरी का भुगतान समय से पहले शुरू करने का निर्देश दिया है. वित्त विभाग के प्रधान सचिव आनंद किशोर ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस तरह का कदम उठाया है। पहले भी त्योहारों के मौके पर कर्मचारियों को समय से पहले वेतन दिया जाता रहा है.
इन कर्मचारियों को समय से पहले वेतन
इस फैसले के तहत न केवल राज्य सरकार के कर्मचारियों को, बल्कि हाई कोर्ट, विधानसभा, विधान परिषद और राजभवन के कर्मचारियों को भी सितंबर का वेतन समय से पहले मिलेगा. वित्त विभाग ने सभी कोषागार पदाधिकारियों को पत्र जारी कर आज से ही सैलरी भुगतान शुरू करने का निर्देश दिया है. इस कदम से कर्मचारियों को दुर्गा पूजा की तैयारियों में आर्थिक सहायता मिलेगी.

कर्मचारियों के हितों में नीतीश सरकार
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि नीतीश सरकार का हमेशा से प्रयास रहा है कि बिहार के कर्मचारी हर त्योहार को खुशी और उत्साह के साथ मनाएं. उन्होंने कहा, उनकी सरकार कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देती है. सितंबर की सैलरी समय से पहले देने का फैसला इसी दिशा में एक कदम है. आज से शुरू हुए इस भुगतान से कर्मचारियों को त्योहार के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी.
पहले भी लिया गया ऐसा फैसला
नीतीश सरकार ने पहले भी होली, ईद और अन्य बड़े त्योहारों के मौके पर समय से पहले वेतन भुगतान का फैसला लिया है. इस बार भी दुर्गा पूजा, जो हिंदुओं का प्रमुख पर्व है, को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है. इस फैसले से कर्मचारियों को त्योहार के दौरान किसी भी तरह की आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

कर्मचारियों में खुशी की लहर
सामान्य तौर पर सरकारी कर्मचारियों को वेतन महीने के अंतिम दिन यानी 30 या 31 तारीख को मिलता है. हालांकि दुर्गा पूजा 22 सितंबर से शुरू हो चुकी है, सरकार ने कर्मचारियों की सुविधा के लिए यह विशेष व्यवस्था की है. कर्मचारियों में इस फैसले को लेकर उत्साह और खुशी का माहौल है, क्योंकि इससे वे त्योहार की तैयारियों को और बेहतर तरीके से कर सकेंगे.
चुनावी साल में कर्मचारियों को साधने की कोशिश
बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में नीतीश सरकार का यह फैसला न केवल कर्मचारियों को त्योहारी राहत देने का प्रयास है, बल्कि चुनावी साल में कर्मचारियों को खुश करने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है. इस कदम से सरकार ने एक बार फिर कर्मचारी हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है.




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