MUZAFFARPUR

बिहार की इस यूनिवर्सिटी में भारी गड़बड़ी, राज्यपाल ने दिए जांच के आदेश

भागलपुर: बिहार के तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के एमबीए विभाग में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि वित्त से संबंधित सभी बिलों को केवल दो अधिकारियों और विभाग के निदेशक के हस्ताक्षर से पास किया गया है. हैरानी की बात यह है कि इन फाइलों पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव के हस्ताक्षर नहीं हैं, जो नियमों का उल्लंघन दर्शाता है.

प्रभारी कुलपति ने शुरू की जांच

वर्तमान प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी जब्त फाइलों को मंगवाया और एमबीए विभाग के निदेशक को पूछताछ के लिए तलब किया है. प्रो. झा इन फाइलों की गहन जांच कर रहे हैं और जल्द ही एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्णय लिया है. हालांकि इस जांच के दायरे में अन्य अधिकारियों के भी शामिल होने की संभावना है.

राजभवन को भेजी जाएगी जांच रिपोर्ट

अधिकारी के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद तैयार रिपोर्ट को राजभवन भेजा जाएगा. राजभवन के दिशा-निर्देशों के आधार पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. इसके लिए विश्वविद्यालय द्वारा राजभवन से विशेष निर्देश भी मांगे जा सकते हैं. कुलसचिव प्रो. रामाशीष पूर्वे ने बताया कि जब्त फाइलें प्रभारी कुलपति को सौंप दी गई हैं और जांच कुलपति स्तर पर चल रही है.

राजभवन ने मांगी 15 दिन में रिपोर्ट

राजभवन ने 17 सितंबर 2025 को टीएमबीयू को 24 शिकायतों से संबंधित एक पत्र भेजा था, जिसमें पूर्व छात्र की शिकायत भी शामिल थी. राजभवन ने विश्वविद्यालय से सभी मामलों की जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है. इससे पहले 24 मई 2025 को राजभवन ने पूर्व कुलपति प्रो. जवाहर लाल के नीतिगत निर्णयों पर रोक लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद एमबीए विभाग में भुगतान किए गए.

पूर्व कुलपति के कार्यकाल में हुई खरीदारी

पिछले सोमवार को विश्वविद्यालय की एक टीम ने एमबीए विभाग में छापेमारी कर विभिन्न खरीदारी से संबंधित फाइलें जब्त की थी. इनमें किताबों, फर्नीचर, पर्दों, डीजी जेनरेटर और तालों की खरीद से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं. ये सभी खरीदारी पूर्व कुलपति प्रो. जवाहर लाल के कार्यकाल में की गई थी. जांच में पाया गया कि राजभवन की रोक के बावजूद कई मामलों में भुगतान किए गए.

पूर्व छात्र की शिकायत ने खोली पोल

पूर्व छात्र ने कुलाधिपति को लिखित शिकायत में पुस्तक और फर्नीचर खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया था. उनकी शिकायत के आधार पर विश्वविद्यालय ने कार्रवाई शुरू की. सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान और भी कई अनियमितताएं सामने आने की संभावना है.

आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर

प्रभारी कुलपति की जांच और राजभवन के दिशा-निर्देशों के बाद इस मामले में दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद है. विश्वविद्यालय प्रशासन और राजभवन की इस मामले में सक्रियता से यह स्पष्ट है कि वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी. आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं.

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