पटना : इस बार शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ आज से शुरु हो गया है. श्रद्धा और भक्ति का यह पर्व पूरे 10 दिनों तक चलेगा और 2 अक्टूबर को विजयदशमी के साथ इसका समापन होगा. नवरात्र का यह पर्व शक्ति की उपासना का प्रतीक है. मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं. सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 22 सितंबर को सुबह 6:09 बजे से 8:06 बजे तक रहेगा. इस दौरान विधिपूर्वक पूजा करने पर साधक को मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसके अतिरिक्त एक अभिजीत मुहूर्त भी उपलब्ध है, जो दोपहर 11:49 बजे से 12:38 बजे तक रहेगा. जो भक्त प्रातःकाल के मुहूर्त में पूजा नहीं कर पाते, वे इस समय घटस्थापना कर सकते हैं.

नवरात्र का पर्व और विजयादशमी
नवरात्र का शुभारंभ आज सोमवार से हुआ और यह दस दिनों तक चलेगा. प्रतिदिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा के बाद अंतिम दिन दशहरा यानी विजयादशमी मनाई जाएगी. यह पर्व 2 अक्टूबर 2025 को संपन्न होगा. इस दिन रावण दहन के साथ अच्छाई की बुराई पर विजय का संदेश दिया जाएगा.

पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना की जाती है. पौराणिक मान्यता है कि पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है. हाथ में त्रिशूल और कमल धारण किए मां शैलपुत्री वृषभ पर सवार होती हैं. इन्हें स्थिरता, धैर्य और शक्ति की देवी माना गया है. भक्त पहले दिन अपने घरों में मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करते हैं, जल, अक्षत, पुष्प और दुग्ध से पूजन करते हैं. पूजा के दौरान विशेष मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है.

हाथी पर सवार होकर आ रही माता
इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जो समृद्धि और स्थिरता का संकेत है. वहीं, विदाई नर (मनुष्य) वाहन से होगी, जिसे शुभ माना गया है. मनुष्य वाहन, विदा के समय सकारात्मक संकेत समझा जाता है. धार्मिक दृष्टि से यह समय बिहार सहित पूरे देश में सामाजिक समरसता और सकारात्मकता का प्रतीक बनेगा.



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