पटना : बिहार के विधानसभा चुनाव में पांच वर्षों में देश की राष्ट्रीय पार्टियों के वोट कम हो गये और क्षेत्रीय पार्टियों के बढ़ गये। वर्ष 2015 में हुए विस चुनाव में राष्ट्रीय पार्टियों को 35 फीसदी वोट मिले थे, जबकि वर्ष 2020 के चुनाव में तीन प्रतिशत कम 32 प्रतिशत वोट मिले थे। राष्ट्रीय पार्टियों के मुकाबले क्षेत्रीय दलों के वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ। वर्ष 2015 के चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों को 42.58 प्रतिशत वोट मिले थे तो वर्ष 2020 में 45.92 प्रतिशत वोट मिले। लगभग तीन प्रतिशत का इजाफा क्षेत्रीय पार्टियों के वोट बैंक में हुआ।

भाजपा के वोट प्रतिशत में कमी और कांग्रेस में वृद्धि
चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 के विस चुनाव की तुलना में वर्ष 2020 में भाजपा के वोट प्रतिशत में कमी आई और कांग्रेस में वृद्धि हुई। वर्ष 2015 में हुए बिहार विस चुनाव में भाजपा को 24.42 फीसदी वोट मिले थे। इस चुनाव में भाजपा को बिहार में 53 सीटें आईं थीं। पांच वर्ष बाद वर्ष 2020 में 21 सटों की वृद्धि के साथ भाजपा की झोली में 74 सीटें आई थी। लेकिन वोट प्रतिशत घटकर 19.46% हो गया था। उधर, कांग्रेस को वर्ष 2015 में 6.66 प्रतिशत वोट मिले थे और 27 सीटें आई थीं। पांच वर्ष बाद कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़कर 9.48% हो गया, पर आठ सीटें कम होकर 19 रह गई थी।
क्षेत्रीय पार्टियों में राजद का वोट बढ़ा : क्षेत्रीय पार्टियों में राजद का वोट प्रतिशत बिहार विस चुनाव में अधिक रहा है। वर्ष 2015 में राजद को 23.11 प्रतिशत तो वर्ष 2020 के विस चुनाव में 18.35 प्रतिशत वोट पड़े हैं। जदयू को वर्ष 2015 में 16.83 प्रतिशत तो 2020 में 15.39 प्रतिशत वोट मिले। दोनों दलों को पांच सालों में नुकसान ही हुआ है। लेकिन लोजपा के वोट प्रतिशत 2015 के 4.83 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में 5.66 प्रतिशत हो गया।
वर्ष 2015 में किस राष्ट्रीय दल को कितना प्रतिशत वोट
भाजपा-24.42 प्रतिशत
कांग्रेस- 6.66 प्रतिशत
बसपा- 2.07 प्रतिशत
सीपीआई- 1.36 प्रतिशत
सीपीएम- 0.61 प्रतिशत
एनसीपी 0.49 प्रतिशत

वर्ष 2020 में किस राट्रीय दल को कितना प्रतिशत वोट
भाजपा- 19.46 प्रतिशत
कांग्रेस- 9.48 प्रतिशत
बसपा- 1.49 प्रतिशत
सीपीआई- 0.83 प्रतिशत
सीपीएम- 0.65 प्रतिशत
एनसीपी- 0.23 प्रतिशत
वोट मिले।




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