पटना: बिहार की राजधानी में आज नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों ने एकजुट होकर हड़ताल की है. जिसके चलते अस्पताल की ओपीडी सेवाएं काफी प्रभावित हुई हैं. हालांकि सुबह 10:00 से पहले जिनका पर्चा कट गया था, उन्हें 12:00 बजे के बाद डॉक्टरों ने देखा है.

स्टाइपेंड में वृद्धि की रखी मांग
इस हड़ताल में पटना के पीएमसीएच, एनएमसीएच, गया का मगध मेडिकल कॉलेज, मुजफ्फरपुर का एसकेएमसीएच और अन्य मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर शामिल रहे. इंटर्न डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि उनकी वर्तमान मासिक स्टाइपेंड की राशि को बढ़ाया जाए.

आर्थिक स्थिति हो रही कमजोर
एनएमसीएच के इंटर्न डॉक्टर पीयूष ने बताया कि वर्तमान समय में उन लोगों की स्टाइपेंड ₹20000 है. इसे बढ़ाकर 40,000 रुपए किया जाए. काम हम भी पूरा करते हैं, लेकिन पैसा आधा मिलता है. सुबह से शाम तक दिन रात मरीजों की देखभाल में लगे रहते हैं, लेकिन हमारी आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है.

बिहार में मिलता है सबसे कम स्टाइपेंड
उन्होंने कहा कि अगर मेडिकल इंटर्न को देशभर में कहीं सबसे कम स्टाइपेंड मिलता है तो वो बिहार है. हमने बीते दिनों स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से मिलकर अपनी बात रखी थी. जिसके बाद आश्वासन मिला था कि स्टाइपेंड को बढ़ाया जाएगा, लेकिन बहुत दिन हो गए कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है.

दूसरे राज्यों में अधिक है स्टाइपेंड
एनएमसीएच के इंटर्न डॉक्टर पंकज कुमार ने बताया कि बिहार की दो प्रमुख संस्थाएं आईजीआईएमएस में ₹30000 और एम्स पटना में ₹32000 प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जबकि अन्य राज्य जैसे पश्चिम बंगाल में ₹43000 और ओडिशा में ₹42000 रुपए स्टाइपेंड दिया जा रहा है.

2022 में हुई थी बढ़ोतरी
उन्होंने कहा कि पिछली बढ़ोतरी वर्ष 2022 में हुई थी, तब इस बात का आश्वासन दिया गया था कि तीन साल बाद पुनः वृद्धि की जाएगी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि अगर हमारी मांग नहीं मानी जाती है तो आने वाले दिनों में अस्पताल में सभी सेवाएं बाधित की जाएगी.

ओपीडी रजिस्ट्रेशन भी बंद
पीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से ना केवल ओपीडी, बल्कि रजिस्ट्रेशन काउंटरों को भी बंद करवा दिया गया. जिससे मरीजों और उनके परिजनों को अस्पतालों में भारी परेशानी झेलनी पड़ी. कई मरीज इलाज के लिए भटकते रहे.



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