बिहार: पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएं हर साल हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं. हालांकि इस व्रत को कुंवारी लड़कियां भी रखती हैं. इस साल ये पर्व 26 अगस्त को मनाया जा रहा है. आइये ज्योतिषाचार्य पंडित मनोहर आचार्य से जानते हैं पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त.

हरतालिका तीज की विधि
हरितालिका व्रत करने के लिए महिलाएं और कुंवारी लड़कियां भगवान शंकर और मां पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाएं. साथ ही फल, फूल, धूप, दीप, प्रसाद की सामग्री, वस्त्र, आसन, चंदन, रौली, सिंदूर, पान का पत्ता, श्रृंगार की सामग्री, दूध, दही और घी इत्यादि सामग्री एकत्रित कर लें.

विधान से करें पूजा-अर्चना
स्नान करके नये वस्त्र धारण करें. हाथ में सहना या अन्य लहठी पहनें. फिर प्रतिमा या तस्वीर के सामने ध्यान लगाकर उक्त व्रत को पूरे विधि-विधान से पूरा करने का संकल्प लें. ध्यान रहे पूजा की शुरुआत ‘ गणेश’ जी से करें. उसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा अर्चना करें और हरतालिका तीज व्रत की कथा करें. इसके बाद धूप-दीप दिखाकर आरती करें.

हरतालिका तीज का शुभ मुहूर्त
इस साल हरतालिका व्रत का शुभ मुहूर्त 26 अगस्त को सुबह 5 बजकर 55 मिनट से 8 बजकर 15 मिनट तक है. अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 15 मिनट से 1 बजकर 15 मिनट तक है. सायंकालीन 6 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 55 मिनट तक रात्रि पूजन करने का विधान है और हस्त नक्षत्र 10 बजकर 15 मिनट तक है. उक्त समयकाल में पूजा-अर्चना करने से मनवांछित फल मिलेगा.

अगले दिन व्रत करें समाप्त
हरतालिका तीज का व्रत रखने के बाद अगले दिन सुबह स्नान और दैनिक क्रियाओं से निवृत होकर महिलाएं और कुंवारी लड़कियां पूजा-अर्चना करें. उसके बाद भगवान को प्रसाद लगाकर प्रसाद ग्रहण करें परिवार समेत अन्य लोगों के बीच प्रसाद वितरण करें.

हरतालिका तीज की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव को पाने के लिए मां पार्वती ने लिए 107 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी. 108 जन्म में भगवान शंकर मां पार्वती की तपस्या से खुश हुए और उन्होंने मां पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया. जिस दिन भगवान शिव ने पार्वती को स्वीकार किया, वह सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी.




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