MUZAFFARPUR

मुजफ्फरपुर :  जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रामबाग में दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

मुजफ्फरपुर :  मंगलवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रामबाग मुजफ्फरपुर में दो दिवसीय (12 एवं 13 अगस्त) संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस संगोष्ठी का शीर्षक शिक्षको को तनाव प्रबंधन में मनोवैज्ञानिक, सामाजिक औऱ दार्शनिक दृष्टिकोण से सशक्त बनाना. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर किया गया साथ द्वितीय वर्ष की प्रशिक्षु छात्राओं के द्वारा स्वागत गान प्रस्तुत कर किया गया.

इस कार्यक्रम के आज के मुख्य अतिथि रवि कुमार, उप निदेशक SCERT, आनंद प्रकाश दुबे, सहायक प्रोफेसर राम दयालू सिंह महाविद्यालय व रजनीश गुप्ता, प्रोफेसर थे.  आनंद प्रकाश दुबे ने आत्म जागरुकता और भावनात्मक नियमितीकरण के माध्यम से बताया कि कैसे हम स्वयं को जागरूक रखते हुए अपने भावनाओं को कैसे नियमित करें कि हम भावनाओं के द्वारा उत्पन्न तनाव को दूर रख सके. अपने बड़े बड़े लक्ष्यों को छोटे छोटे भाग में बांट कर उसे प्राप्त करने का प्रयास करें इससे लक्ष्य के बहुत बड़े होने का भय समाप्त हो जाएगा.

हमारे सामाजिक संस्कृतिक नियम और वातावरण का दबाव हमारे ऊपर सदैव बना रहता है जिसमें हम भावनात्मक रूप से तनाव में आ जाते हैं. इसके लिए हमें भावनात्मक संतुलन बनाना पड़ेगा. उप निदेशक रवि कुमार ने कहा कि इस धरती पर ऐसा कोई मनुष्य नहीं जिसके जीवन में तनाव ना हों. हमे इस तनाव को अपने ज्ञान कुशलता के आधार पर हल करना चाहिए और सम्भव हो तो हमें तनाव को खुद के ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए.

इसके पश्चात प्रोफेसर रजनीश ने बताया कि तनाव भी दो प्रकार के होते एक जो हमे आगे बढ़ने को प्रेरित करते हैं और दूसरा जिसे हम अपनी कुशलता से हल नहीं कर पाते. ऐसे तनाव से हमें डरना नहीं चाहिए ब्लकि सचेत होकर उसे हल करना चाहिए.

डरने से वह समस्या और भी अधिक विकराल हो जाएगी. इन्होंने कहा कि डरने से हमें बेचैनी , घबराहट और अवसाद जैसी दिक्कतें आ सकती हैं. इसके लिए हमें अपनी उन बातों को जिससे हमें तनाव चिंता और घबराहट होती हैं उन्हें किसी मित्र सहयोगी से खुल कर बतानी चाहिए इससे मानसिक दबाव कम हो जाता है और यदि आवश्यक हो तो चिकित्सक की सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए.

हमे अपनी क्षमता के अनुसार ही कार्यों का चयन करना चाहिए ना कि दिखाने के चक्कर में बड़ा लक्ष्य या कार्य चुन ले और फिर उसे प्राप्त न कर पाने से तनाव से ग्रस्त हो जाए. हमें उपलब्ध संसाधनों से बेहतर करने की क्षमता उत्पन्न करनी चाहिए. कल दिनाँक 13/8/2025 को पुनः तनाव को दूर करने से संबंधित तथ्यों पर चर्चा विषय विशेषज्ञ द्वारा की तदुपरांत इस दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन किया जाएगा.

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