मुजफ्फरपुर : मुजफ्फरपुर में NBI संस्थान द्वारा मिठनपुरा स्थित आर.के. सभागार में “बज्जिका मैन्युस्क्रिप्ट पेंटिंग कार्यशाला एवं जनजागरूकता कार्यक्रम” का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की परिकल्पना एवं संयोजन NBI के संस्थापक एवं निदेशक आनंद कुमार द्वारा किया गया, जो हाल ही में NIFT, नई दिल्ली में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में भाग लेकर लौटे हैं।


कार्यक्रम में NIFT (Dept. of Leather Design) के प्रोजेक्ट हेड एवं विभागाध्यक्ष डॉ. उज्ज्वल अंकुर ने वर्चुअल माध्यम से विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने 3000 वर्षों से अधिक पुरानी बज्जिका लोक-संस्कृति, इतिहास एवं बज्जिका कला की विशिष्टता पर गहन जानकारी दी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बज्जिका मैन्युस्क्रिप्ट पेंटिंग पारंपरिक चित्रकला से एकदम भिन्न एवं विशिष्ट शैली है।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय साहित्य की प्रख्यात अनुवादक, एस.टी.ओ. पदाधिकारी एवं कर्मठ सम्पादक डॉ. पद्मिनी भटनागर की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) से प्रशासनिक अधिकारी योगेश उपाध्याय एवं डॉ. विश्वजीत भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने प्रकाशन क्षेत्र में संपादन की भूमिका तथा NBT के कार्यों को विस्तृत रूप से समझाया और एक प्रभावशाली प्रेजेंटेशन के माध्यम से विद्यार्थियों को अवगत कराया।

साहित्यिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से डॉ. भावना (बज्जिका साहित्यकार), लेखिका हिमां सिंह, रंगकर्मी रमेश रत्नाकर, तथा NBI के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गोपाल फलक एवं समाजसेवी डॉ. विजेश ने भी अपनी प्रेरक उपस्थिति एवं वक्तव्य से कार्यशाला की गरिमा बढ़ाई। सभी अतिथियों ने बज्जिका भाषा, साहित्य, कविता, कथा एवं नाटक में बज्जिका शैली के समृद्ध उपयोग पर बल दिया और इसे जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के 335 से अधिक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे, जिन्होंने बज्जिका कला की इस विलुप्त होती विधा को जानने, समझने और अपनाने में गहरी रुचि दिखाई।

कार्यक्रम का उद्देश्य बज्जिका कला को उसकी मूल पहचान और गरिमा के साथ पुनर्जीवित कर, आने वाली पीढ़ी को उससे जोड़ना रहा। सभी प्रतिभागियों को भारतीयता, कल्पनाशीलता, और भाषा के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति हेतु प्रेरित किया गया।







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