MUZAFFARPUR

मुजफ्फरपुर में सावन की सुरम्य संध्या में ‘चतुरंगी फुहार’ ने बाँधा सुर, शब्द और भावना का समां….

मुजफ्फरपुर: सुरंगमा कला केंद्र साहित्य मंच द्वारा आयोजित सावनी संगीतिक-साहित्यिक संध्या “चतुरंगी फुहार” का भव्य आयोजन सावन की रिमझिम फुहारों के बीच संगीत, कविता और मित्रता की मिठास के संग संपन्न हुआ।  सखा भाव की बगिया” विषय पर आधारित इस विशेष कार्यक्रम ने श्रोताओं को लोक, शास्त्रीय और आधुनिक भावनाओं से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. संजय पंकज ने की।  वहीं मुख्य अतिथि के तौर पर  डॉ. रंगीला सिन्हा इस कार्यक्रम में उपस्थित रहीं।

साथ ही विशिष्ट अतिथियों में डॉ. विद्या कुमारी सिंह, डॉ. अरुण शाह, केदारनाथ प्रसाद, पर्यावरणविद् सुरेश कुमार गुप्ता, डॉ. अनु शांडिल्य, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुजीत कुमार, किलकारी, मुजफ्फरपुर की निदेशिका पूनम कुमारी एवं नितू तुलस्यान की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की संगीतिक रूपरेखा में शिव वंदना से लेकर सूफी, ग़ज़ल, झूमर, कजरी और प्रेमगीतों की सुंदर श्रृंखला प्रस्तुत की गई। डॉ. पुष्पा प्रसाद की रुद्राष्टकम और भोजपुरी झूमर “परदेसवा न जईह पिया सावन में” ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

डॉ. वंदना विजयलक्ष्मी ने शिव नचारी और कजरी गायन से प्रस्तुति को ऊर्जावान रूप प्रदान किया।

डॉ. अनु शांडिल्य की कविताओं और गीतों ने मंच को साहित्यिक गरिमा से समृद्ध किया।

स्वागत गीत (दिनकर काव्य आधारित), बनारसी व मिर्जापुरी कजरी और शिवदास पाण्डेय की प्रेम गीत “मुझको दुनिया की सारी खुशी चाहिए” की भावभीनी प्रस्तुति ने शाम को यादगार बना दिया।”आज जाने की ज़िद न करो”, “छाप तिलक सब छीनी”, और “रहे ना रहे हम” जैसे गीतों ने सांगीतिक रंगों को और गहरा किया। इस अवसर पर पर्यावरण विद् सुरेश गुप्ता द्वारा लीची की आकृति वाली बैग और लीची की जूस और लीची की टॉफी वितरित कर और लीची की आकृति वाली साल उठकर लिच्छीपुरम का संदेश दिया गया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. संजय पंकज ने सुरंगमा की इस प्रस्तुति को “सावन की सांस्कृतिक सुगंध” की संज्ञा दी।धन्यवाद ज्ञापन डॉ. माया शंकर प्रसाद द्वारा किया गया।‘चतुरंगी फुहार’ एक ऐसा सांस्कृतिक आयोजन बन गया, जहाँ सुर, शब्द और सखा भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह संध्या संगीत प्रेमियों के हृदय में लम्बे समय तक गूंजती रहेगी।

 

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