मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर स्मार्ट होते शहर में बीबीगंज-भामाशाह द्वार मुख्य सड़क इतनी जर्जर हो चुकी है कि कदम-कदम पर खतरा है। 1320 मीटर लंबी इस सड़क से आठ बड़े मोहल्लों का सीधे तौर पर जुड़ाव है। दर्जनभर से अधिक सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चों का आना-जाना है, लेकिन जिम्मेदार हादसों की आशंका से बेखबर हैं। यह हाल तब है, जबकि इसी रोड में कई माननीयों के आवास हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क बने दो साल हो गए हैं। बताया कि निर्माण के दो माह बाद ही यह सड़क टूटने लगी थी। नाला निर्माण के दौरान खोदी गई सड़क की मरम्मत नहीं होने से आज पता ही नहीं चलता कि सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।

कहीं-कहीं तो इतनी खतरनाक स्थिति हो गई है कि जरा-सी चूक बड़े हादसे का सबब बन सकती है। 50 हजार से अधिक की आबादी के लिए बाईपास का काम करने वाली इस सड़क की अनदेखी से लोगों में आक्रोश है। खासकर स्कूली बच्चों के साथ कोई हादसा न हो, इसका डर बना रहता है। बीबीगंज-भामाशाह द्वार सड़क की लंबाई 1320 मीटर है। यह 183 करोड़ की परियोजना है, जिसमें एसटीपी व आउटर नाला निर्माण भी शामिल है। नाला निर्माण की वजह से सड़क कई जगहों पर टूट गई, जिसकी मरम्मत नहीं होने से आज यह गड्ढों में तब्दील हो गई है। अलकापुरी, नंदपुरी और गायत्री नगर के पास यह सड़क धंस गई है, जिससे आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। एनएच 722 और एनएच 22 को जोड़ने वाली यह सड़क आज बाईपास का रूप ले चुकी है।

भगवानपुर गोलंबर के जाम से बचने के लिए इसपर लगातार बड़े वाहनों का ट्रैफिक बढ़ता जा रहा है। दिन के बजाए रात में इस रूट पर बड़ी गाड़ियां अधिक चलती हैं। दबाव के कारण कमजोर हो चुकी सड़क जगह-जगह से टूट रही है। स्थानीय लोगों की शिकायत के बावजूद पथ निर्माण विभाग इसपर संज्ञान नहीं ले रहा है। इससे लोगों की दुकानदारी भी प्रभावित हो रही है। गाड़ियों के आवागमन से घरों के अलावा दुकानों में धूल की परतें जम रही हैं। इसके कारण लोगों का सांस लेना मुहाल है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि तकरीबन दो साल पहले इस सड़क और नाले का निर्माण हुआ, लेकिन गुणवत्ता खराब रहने के कारण निर्माण के दूसरे महीने से ही सड़क टूटने लगी। कई जगहों पर धंस भी गई है। बीबीगंज मुहाने पर यह सड़क जानलेवा हो गई है। बारिश में जलजमाव होने पर बाइक सवार व पैदल राहगीर गिरकर चोटिल होते हैं। घुटनेभर से अधिक पानी जमा हो जाता है। वहीं हरेंद्र राय ने बताया कि नाले का निर्माण ठीक से नहीं हुआ है। इसका लेवल सड़क से दो फीट ऊंचा है।

पानी निकलने के बजाए रुक जाता है
छह महीने में तीन जगहों पर धंस गई सड़क स्थानीय लोगों ने बताया कि हाल के छह महीने में तीन जगहों पर यह सड़क धंस गई है। इसी से सड़क की गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है। दूसरी ओर बेतरतीब नाला निर्माण से सड़क की चौड़ाई भी करीब दो से पांच मीटर तक सिकुड़ गई है। किसी भी साइड से ट्रक या बस आ जाए तो छोटी गाड़ियां तो दूर, बाइक तक निकालने में परेशानी होती है।

कई बार तो जाम से निकलने के दौरान गाड़ियों में टक्कर भी होती है। बेतरतीब नाला निर्माण से गाड़ियां क्षतिग्रस्त भी हो जाती हैं। अगर इसका समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले लेगी। बड़े हादसे की आशंका है। सड़क की जर्जर हालत पर बुडको ने शिकायतों के बाद भी ध्यान नहीं दिया।

दर्जनभर स्कूलों के बच्चे गुजरते हैं इस सड़क से
बच्चों ने कहा कि बीबीगंज से भामाशाह द्वार के बीच एक दर्जन सरकारी और निजी स्कूल हैं, जहां के सात से आठ हजार बच्चों का प्रतिदिन इस रोड से आना-जाना है। इसके अलावा दूसरे स्कूलों के बच्चे और स्कूल वैन भी इस रोड से गुजरती है। इनके लिए भी इस सड़क से गुजरना जोखिमभरा है। पांच मिनट के रास्ते में 15 से 25 मिनट से अधिक समय लग रहा है। गर्मी में बच्चे परेशान होते हैं। कई दफा घर लौटते और स्कूल जाने के क्रम में बड़ी गाड़ियों की चपेट में आने से बचते हैं। इसी रास्ते में वैशाली सांसद वीणा देवी और विधान पार्षद दिनेश कुमार सिंह का भी आवास है। बावजूद इसपर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।





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