पटना: बिहार में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की रणनीति में एक बड़ा बदलाव साफ नजर आ रहा है. पार्टी के कद्दावर नेता और ‘चुनावी चाणक्य’ माने जाने वाले अमित शाह इस बार राज्य से दूरी बनाए हुए हैं. जहां पहले हर चुनाव से पहले बिहार में उनका लगातार दौरा और बैठक आम बात होती थीं, वहीं इस बार बीते साढ़े तीन महीने से न तो कोई दौरा हुआ है और न ही कोई अगला कार्यक्रम तय है.


शाह की चुप्पी और मोदी की बढ़ती सक्रियता
इस सियासी सन्नाटे ने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है. इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद बिहार में सक्रिय हो गए हैं. लगातार दौरों, जनसभाओं और परियोजनाओं के उद्घाटन के जरिए यह संकेत दे रहे हैं कि 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कमान सीधे अपने हाथ में ले ली है. यह बदली हुई रणनीति राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों दोनों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है.

‘दूरी बनाना आश्चर्यजनक है’
राजनीतिक विशेषज्ञ अरुण पांडे का मानना है कि अमित शाह की यह दूरी साधारण नहीं है खासकर तब जब चुनाव सिर पर हो. वे कहते हैं कि “अमित शाह बीजेपी के चाणक्य हैं और चुनावी मौसम में इतने लंबे समय तक दूरी बनाना आश्चर्यजनक है. संभव है कि बिहार की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ले ली हो, क्योंकि यहां नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार चल रही है और उसे बनाए रखना बीजेपी की पहली प्राथमिकता है.”

सीएम फेस पर चुप्पी और महाराष्ट्र मॉडल की चर्चा
एक इंटरव्यू में जब अमित शाह से पूछा गया कि बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री कौन होगा तो उनका जवाब था चुनाव के बाद समय बताएगा. इस बयान ने विपक्ष को हमला करने का मौका दे दिया. कांग्रेस और राजद जैसे दलों का आरोप है कि बीजेपी यहां भी महाराष्ट्र मॉडल लागू करना चाहती है. कई कांग्रेस नेताओं का तो यह भी कहना है कि अमित शाह नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री नहीं देखना चाहते और इसी संभावित विवाद से बचने के लिए उन्हें बिहार की सियासी जमीन से दूर रखा गया है.

पिछले साल मार्च में आये थे बिहार
बीजेपी के चुनावी रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आखिरी बार बिहार का दौरा 29 और 30 मार्च 2025 को किया था. इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ मुख्यमंत्री आवास में एनडीए के सभी घटक दलों के शीर्ष नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की थी. साथ ही उन्होंने भाजपा नेताओं के साथ अलग से चुनावी समीक्षा बैठक कर जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए थे.

सीमांचल दौरा अचानक हो गया था रद्द
इसके बाद उनका अगला दौरा 15 जून को सीमांचल (फारबिसगंज) में तय हुआ था, जहां एक बड़ी जनसभा होनी थी, लेकिन ऐन वक्त पर वह दौरा रद्द कर दिया गया. उस समय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने मीडिया को बताया था कि यह दौरा अब 20 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिवान रैली के बाद होगा और शाह का कार्यक्रम नया तय किया जाएगा.

अब तक नहीं आया बिहार दौरे का कार्यक्रम
हालांकि, 20 जून बीत जाने के बाद भी न तो कोई नया कार्यक्रम सामने आया और न ही पार्टी ने इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान दिया. भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता फिलहाल इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे अटकलों का दौर और तेज हो गया है.
‘बिहार चुनाव में जरूर आएंगे’
जदयू प्रवक्ता नवल शर्मा का भी कहना है कि अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं उनके पास पूरे देश की बड़ी जिम्मेदारी है. काफी व्यस्तता रहती है लेकिन विधानसभा चुनाव में बिहार जरूर आएंगे. नीतीश कुमार के तरफ से किसी तरह का कोई दबाव नहीं है. जदयू प्रवक्ता का यह भी दावा है कि बिहार एनडीए में बेहतर तालमेल है और प्रधानमंत्री का कार्यक्रम भी हो रहा है और जब जरूरत होगा तो अमित शाह भी आएंगे.

शाह के दौरे से विपक्षी खेमे में रहता है हड़कंप
अमित शाह जिस राज्य में भी विधानसभा का चुनाव होता है वहां बूथ लेवल तक चुनावी मैनेजमेंट करते हैं. पार्टी के नेताओं की जिम्मेदारी तय करते हैं. प्रदेश ही नहीं प्रदेश के बाहर के नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है और उसमें भी बड़ी भूमिका निभाते हैं. एक तरह से विधानसभा जीतने का रणनीति तैयार करते हैं. अमित शाह के दौरे से विपक्षी खेमे में भी हड़कंप मचा रहता है.




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