मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर स्थित निजी सभागार में डॉ. शांति कुमारी सेवा संस्थान द्वारा देश के तीन नामचीन साहित्यकारों के लिए सम्मान समरोह का आयोजन किया गया। जिसमें दिल्ली के विजय कुमार स्वर्णकार को डॉ शांति कुमारी गजल, वाराणसी के हीरालाल मिश्र मधुकार को डॉ शांति कुमारी गीत और पटना के इं.रामनरेश शर्मा को डॉ शांति कुमारी लोकभाषा सम्मान से सम्मानित किया गया.


इन तीनों साहित्यकारों को सम्मान के तौर पर प्रशस्ति-पत्र, मोमेंटों, अंगवस्त्र और 5100 की राशि भेंट की गयी. कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के अध्यक्ष डॉ अनिल कुमार, सचिव डॉ भावना, डॉ संजय पंकज, डॉ अमर पंकज, अनिरुद्ध सिन्हा, डॉ देवव्रत अकेला, डॉ रवींद्र उपाध्याय व गोपाल फलक ने संयुक्त रूप से किया. वहीं अपने स्वागत भाषण में डॉ भावना ने कहा कि शिक्षाविद् और साहित्यकार डॉ शांति कुमारी के नाम पर केंद्रित यह सम्मान पिछले चार वर्षों से साहित्य की विधा में उत्कृष्ट योगदान के लिये साहित्यकारों को दिया जाता है.


ऐसे में डॉ शांति कुमारी सेवा संस्थान तीनों साहित्यकारों को सम्मानित कर गौरवान्वित महसूस कर रहा है. हीरालाल मिश्र मधुकर ने कहा कि डॉ शांति कुमारी सम्मान डॉ भावना के प्रेम और समर्पण का प्रतिफल है. आज के टूटते-बिखरते समय में इस तरह का सम्मान पाना गौरव की बात है. आगे विजय कुमार स्वर्णकार ने कहा कि हिंदी गजलों के लिये इस तरह का सम्मान मिलने से लेखन को ऊर्जा मिलती है.


आज हिंदी गजल सबसे लोकप्रिय विधा है. मेरा प्रयास है कि हिंदी गजल को उर्दू गजल की ऊंचाई मिले. डॉ शांति कुमारी सम्मान से सभी बज्जिकाभाषी सम्मानित हुये हैं. बज्जिका भाषा के जागरण में इस तरह का सम्मान महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा. संचालन गोपाल फलक ने किया.


छह किताबों का हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पांच पुस्तकों का लाकार्पण हुआ. जिसमें डॉ भावना का बज्जिका उपन्यास लाडो, हिंदी गजल : दृष्टि और संकल्पनाएं, अग्निपथ, चुने हुये शेर, डॉ अमर पंकज की प्रतिनधि गजलें और वैशाली राय की अंग्रजी पुस्तक पेन टू परपस का लोकार्पण किया गया. इस मौके पर डॉ देवव्रत अकेला, डॉ.ज्वाला सांध्यपुष्प, जियाउर रहमान जाफरी, डॉ अमर पंकज और डॉ हरिनारायण ठाकुर ने पुस्तक पर चर्चा की. वक्ताओं ने कहा कि सभी पुस्तकें आज के समय की जरूरत है. इन पुस्तकों से समाज को सकारात्मक संदेश मिलेगा.


कार्यक्रम के तीसरे सत्र में कवि सम्मेलन हुआ, जिसकी कमान आधी आबादी ने संभाली. इस मौके पर डॉ विद्या चौधरी, डॉ अर्चना सिंह, माधुरी स्वर्णकार, अनीता सिंह, लता ज्योतिर्मय, विनय कुमार, प्रमोद नारायण मिश्र, चांदनी समर, नसीम अख्तर, अविनाश बंधु, अविनाश भारती,


राजीव नयन, राहुल, अखौरी चंद्र शेखर, हेमा सिंह, डॉ सोनी, डॉ अनु, अर्चना कुमारी, आचार्य सीताराम, गोपाल फलक, राहुल शिवाय, डॉ भावना, अनिरुद्ध, देवेंद्र राकेश, उदय नारायण सिंह, ज्वाला सांध्यपुष्प, डॉ यशवंत कुमार ने रचनाओं का पाठ किया. सभी रचनाकारों को अंगवस्त्र और मोमेंटो भेंट किया गया.






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