MUZAFFARPUR

बिहार के राजनीतिक दलों को चुनाव चिन्ह आवंटित, किसी को मिला ‘गैस सिलेंडर’ तो किसी को ‘स्कूल बैग’

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है. राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं, वहीं निर्वाचन आयोग ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है.

आयोग ने कई राजनीतिक दलों को चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं, जिससे छोटे दलों की लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो गई है. खास तौर पर विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) और जन सुराज पार्टी जैसे दलों को उनके चुनाव चिह्न मिल गए हैं.

विकासशील इंसान पार्टी का बदला चुनाव चिन्ह

मुकेश साहनी के नेतृत्व वाली विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को एक बार फिर उनका पुराना चुनाव चिह्न ‘नाविक के साथ नाव’ आवंटित किया गया है. पिछले लोकसभा चुनाव 2024 में वीआईपी को ‘लेडीज पर्स’ चिह्न दिया गया था, जिसके बाद पार्टी ने पुराने चिह्न को वापस पाने के लिए कई प्रावधानों को पूरा किया. मुकेश साहनी ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि ‘नाव’ उनके समुदाय और पार्टी की भावनाओं से गहराई से जुड़ा है.

राष्ट्रीय लोक मोर्चा का स्थायी चिन्ह

पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) को भी उनका पुराना चुनाव चिह्न ‘गैस सिलेंडर’ स्थायी रूप से आवंटित किया गया है. रालोमो, जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा है, इस चिह्न के साथ बिहार की सभी विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. कुशवाहा की पार्टी का कोइरी और कुशवाहा समुदाय में मजबूत आधार माना जाता है, और यह चिन्ह उनके घरेलू मुद्दों पर फोकस को दर्शाता है.

जन सुराज को ‘स्कूल बैग’ के साथ नई उम्मीद

चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को ‘स्कूल बैग’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है. यह चिन्ह पहले भी पार्टी को मिला था, और अब इसे स्थायी रूप से स्वीकार किया गया है. जन सुराज ने इस चिन्ह को शिक्षा और प्रगति का प्रतीक बताते हुए इसका स्वागत किया है.

प्रशांत किशोर ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जिसमें कम से कम 40 सीटों पर महिला प्रत्याशी होंगी. पार्टी का फोकस शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक सुधारों पर है.

चुनाव की तारीखें और तैयारियां

बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त होने वाला है, जिसके चलते चुनाव आयोग सितंबर-अक्टूबर 2025 में चुनाव कराने की तैयारी में है. आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य शुरू कर दिया है, जो 29 अक्टूबर से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के तौर पर चलेगा. इसके तहत नए मतदाताओं को जोड़ा जाएगा और सूची को सटीक बनाया जाएगा.

बिहार की सियासत में त्रिकोणीय मुकाबला

बिहार में इस बार का चुनाव एनडीए और महागठबंधन के बीच मुख्य मुकाबले के साथ त्रिकोणीय होने की संभावना है. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी तीसरे विकल्प के रूप में उभर रही है, जो किसी भी गठबंधन से समझौता न करने की रणनीति पर काम कर रही है.

वहीं, एनडीए में बीजेपी, जेडीयू, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), और रालोमो शामिल हैं, जबकि महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस और वाम दल हैं. छोटे दलों की भूमिका इस बार निर्णायक हो सकती है, जिससे बिहार की सियासत और रोचक हो गई है.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 न केवल राजनीतिक दलों के लिए बल्कि मतदाताओं के लिए भी एक बड़ा अवसर है, जहां वे अपने नेतृत्व को चुनेंगे. चुनाव चिह्नों के आवंटन के साथ अब दलों की रणनीतियां और स्पष्ट होंगी, और बिहार की जनता को इन प्रतीकों के जरिए अपनी पसंद का प्रतिनिधित्व चुनने का मौका मिलेगा.

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