पटना: जब से बोर्ड-निगम और आयोगों में एनडीए नेताओं के परिवार को एडजस्ट करने को लेकर तेजस्वी यादव ने सवाल उठाए हैं, तब से सत्ता पक्ष उन पर हमलावर है. चिराग पासवान की ओर से उनके जीजा और जमुई से एलजेपीआर सांसद अरुण भारती ने मोर्चा संभाल रखा है.

एक बार फिर उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पर जोरदार हमला बोला है. हालांकि निशाना साधने के चक्कर में उनके फायरिंग रेंज में खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आ गए हैं.

बिहार का जातीय सर्वे आधा-अधूरा
अरुण भारती ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर बिहार की जाति आधारित गणना याना जातीय सर्वेक्षण को लेकर तेजस्वी यादव पर हमला बोला है.

उन्होंने आरोप लगाया कि जब बिहार में महागठबंधन की सरकार थी, तब आधे-अधूरे जातीय सर्वेक्षण को सिर्फ इसलिए जारी कर दिया गया ताकि तेजस्वी अपने वोट बैंक की दावेदारी को मजबूत कर सकें. उस दौरान बहुजनों को गिनती तक ही सीमित रखा गया.

चिराग कराएंगे ‘असली जनगणना’
वहीं केंद्र सरकार की ओर से घोषित जाति जनगणना का श्रेय लेते हुए अरुण भारती ने कहा कि तेजस्वी ने जहां बिहार में आधा-अधूरा जातीय सर्वे कराया, वहीं अब चिराग पासवान की निर्णायक भूमिका के कारण केंद्र सरकार वास्तविक जातीय जनगणना कराने जा रही है.

तेजस्वी ने रची साजिश: अरुण भारती ने कहा कि इस सर्वेक्षण ने सिर्फ जातियों की संख्या गिनी. यानी कौन-सी जाति कितनी है? सिर्फ अपने M-Y वोट बैंक की ताकत को दिखाना तेजस्वी यादव का मकसद था, जोकि अपने वोट बैंक को सत्ता और प्रशासन में बनाए रखने की एक सोची समझी साजिश थी.

एलजेपीआर सांसद ने उठाए गंभीर सवाल
जमुई सांसद अरुण भारती ने कहा कि बिहार कास्ट सेंसस का पूरा आयोजन बहुजन समाज — खासकर दलित, महादलित और आदिवासी समुदाय के साथ सीधा छल करना था. अगर वाकई में बहुजन समाज के हक में काम होता तो एक न्यायिक आयोग गठित होता, मगर महागठबंधन की सरकार ने नहीं किया.

एक सामाजिक-आर्थिक रिपोर्ट तैयार की जाती, मगर महागठबंधन की सरकार ने नहीं किया. साथ ही बहुजन समाज की सरकारी सेवाओं में हिस्सेदारी के आंकड़े सामने लाए जाए, मगर महागठबंधन की सरकार ने यह भी नहीं किया गया.
कब जारी हुई थी जातीय सर्वे की रिपोर्ट?
2 अक्टूबर 2023 को महात्मा गांधी की जयंती पर बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना (जातीय सर्वेक्षण) की रिपोर्ट को जारी किया था. जब ये रिपोर्ट सामने आई थी, तब महागठबंधन की सरकार थी. तेजस्वी यादव भले ही सरकार में डिप्टी सीएम थे लेकिन मुख्यमंत्री तब भी नीतीश कुमार ही थे.

ऐसे में अरुण भारती के सवाल उठाने से सीधे-सीधे सरकार के मुखिया होने के नाते नीतीश कुमार कटघरे में आ जाते हैं. वैसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इसको लेकर सवाल उठा चुके हैं, जबकि कांग्रेस भी तब सरकार का हिस्सा थी.


Leave a Reply