उत्तराखंड: आज सुबह लगभग 5:30 बजे केदारनाथ धाम से तीर्थयात्रियों को लेकर गुप्तकाशी लौट रहा आर्यन एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का एक हेलीकॉप्टर गौरीकुंड के समीप धुरी खर्क (गौरी माई खर्क) के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

इस दुखद हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार सभी सात लोगों की मृत्यु हो गई। मृतकों में महाराष्ट्र के एक दंपति, उनकी 23 महीने की बेटी, पायलट, और अन्य यात्री शामिल हैं। रुद्रप्रयाग जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह राजवार ने दुर्घटना की पुष्टि की है।

दुर्घटना का विवरण
हेलीकॉप्टर, एक बेल 407 यूटिलिटी चॉपर, केदारनाथ से सुबह 5:17 बजे गुप्तकाशी के लिए रवाना हुआ था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खराब मौसम और घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी, जिसके चलते पायलट का नियंत्रण बिगड़ा और हेलीकॉप्टर गौरीकुंड से लगभग 5 किलोमीटर ऊपर केदारघाटी के सुदूर जंगली इलाके में क्रैश हो गया। दुर्घटना के बाद हेलीकॉप्टर में आग लग गई, जिससे बचाव कार्य और जटिल हो गया।

मृतकों की पहचान
मृतकों की पहचान निम्नलिखित रूप से की गई है:
1. कैप्टन राजवीर सिंह चौहान (पायलट), जयपुर, राजस्थान।

2. विक्रम रावत (45), बीकेटीसी प्रतिनिधि, रासी, उखीमठ, उत्तराखंड
3. विनोद देवी (66), उत्तर प्रदेश
4. तृष्टि सिंह (19), उत्तर प्रदेश
5. राजकुमार सुरेश जायसवाल (41), महाराष्ट्र
6. श्रद्धा राजकुमार जायसवाल (35), महाराष्ट्र
7. काशी जायसवाल (23 महीने), महाराष्ट्र
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महाराष्ट्र के इस दंपति का एक बेटा इस यात्रा में शामिल नहीं था और वह सुरक्षित है।
बचाव और राहत कार्य
दुर्घटना की सूचना मिलते ही राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), और स्थानीय पुलिस की टीमें तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुईं। SDRF कमांडेंट अर्पण यदुवंशी के नेतृत्व में बचाव दल ने जोरसी (गौरीकुंड के ऊपर) के सुदूर इलाके में पहुंचकर सभी सात शवों को बरामद किया।

उत्तराखंड पुलिस ने पुष्टि की कि हेलीकॉप्टर पूरी तरह जल चुका था, जिसने बचाव कार्य को चुनौतीपूर्ण बनाया। जिला पर्यटन विकास अधिकारी राहुल चौबे ने बताया कि खराब मौसम के कारण पायलट को घाटी से बाहर ले जाना पड़ा, जो दुर्घटना का एक कारण हो सकता है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “रुद्रप्रयाग जिले में हेलीकॉप्टर दुर्घटना की अत्यंत दुखद खबर प्राप्त हुई। SDRF, स्थानीय प्रशासन और अन्य बचाव दल राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं। मैं बाबा केदार से सभी यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करता हूं।

” उन्होंने मुख्य सचिव को एक तकनीकी विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए, जो हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा और तकनीकी प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा करेगी। साथ ही, एक नया मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार किया जाएगा, जिसमें हेलीकॉप्टरों की तकनीकी जांच और रीयल-टाइम मौसम की निगरानी अनिवार्य होगी।

हेलीकॉप्टर सेवाओं पर प्रभाव
इस दुर्घटना के बाद उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर सेवाओं को दो दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है। यह पिछले छह सप्ताह में उत्तराखंड में पांचवीं हेलीकॉप्टर दुर्घटना है।

इससे पहले 8 मई को उत्तरकाशी में गंगोत्री धाम जा रहे एक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से छह लोगों की मृत्यु हुई थी, और 7 जून को एक अन्य हेलीकॉप्टर को तकनीकी खराबी के कारण सड़क पर आपात लैंडिंग करनी पड़ी थी।

जांच और भविष्य के कदम
उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) ने बयान जारी कर कहा कि दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए एक टीम घटनास्थल पर भेजी गई है। UCADA की सीईओ सोनिका ने बताया कि जांच दल हादसे के सभी पहलुओं की गहन पड़ताल करेगा। मुख्यमंत्री धामी ने पहले से गठित एक उच्चस्तरीय समिति को इस दुर्घटना की भी जांच करने का निर्देश दिया है, जो हाल की सभी हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण कर जिम्मेदारियों का निर्धारण करेगी।

पृष्ठभूमि और संवेदनशीलता
केदारनाथ मार्ग ऊंचाई, कठिन भूभाग, और अप्रत्याशित मौसम के कारण हेलीकॉप्टर संचालन के लिए अत्यंत संवेदनशील है।

चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं तीर्थयात्रियों, आपदा प्रबंधन, और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस दुर्घटना ने हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा मानकों पर फिर से सवाल उठाए हैं।




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