प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गोपालगंज वासियों को बड़ा तोहफा दिया और रोहतास के विक्रमगंज से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 2.75 किलोमीटर लंबे, चार-लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन किया. इस एलिवेटेड कॉरिडोर को मात्र दो सालों के रिकॉर्ड समय में 184.90 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है.


2.75 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर का लोकार्पण: चार-लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर गोपालगंज शहर के लोगों को भीषण जाम से निजात दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. यह अत्याधुनिक कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग 27 (NH 27) पर बनाया गया है, जो गुवाहाटी से दिल्ली को जोड़ता है.

जाम से मिलेगी मुक्ति
बता दें कि NH 27 पर यातायात का भारी दबाव रहता है. खासकर गोपालगंज शहर के भीतर, जहां अक्सर घंटों तक जाम की स्थिति बनी रहती थी. नए ईस्ट एंड वेस्ट कॉरिडोर के निर्माण से अब इस मुख्य मार्ग पर यातायात का प्रवाह सुगम हो जाएगा, जिससे यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की बचत होगी.

कई फ्लाईओवर और अंडरपास शामिल
इस कॉरिडोर में कई फ्लाईओवर और अंडरपास शामिल हैं, जो शहर के विभिन्न हिस्सों से यातायात को अलग करते हुए निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करेंगे. यह परियोजना न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि NH 27 से गुजरने वाले लंबी दूरी के यात्रियों के लिए भी एक बड़ी राहत है. सुगम यातायात प्रवाह से व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि माल ढुलाई अब अधिक तेजी से और कुशलता से हो सकेगी.

श्रेय लेने की मची होड़
इस परियोजना के पूरा होने के साथ ही, इसके श्रेय को लेकर राजनीतिक गलियारों में होड़ मच गई है. दरअसल भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद और जनता दल यूनाइटेड के वर्तमान सांसद, दोनों ही इस उपलब्धि का श्रेय अपने-अपने प्रयासों को दे रहे हैं.

बीजेपी बता रही अपने प्रयासों का परिणाम
भाजपा के पूर्व सांसद और वर्तमान अनुसूचित जाति जनजाति विभाग के मंत्री दावा कर रहे हैं कि यह परियोजना उनके कार्यकाल के दौरान शुरू हुई थी और उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम है. वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उन्होंने ही केंद्र सरकार से इसके लिए स्वीकृति दिलवाई थी.

वर्तमान जेडीयू सांसद ने कही ये बात
वहीं, जदयू के वर्तमान सांसद डॉक्टर आलोक कुमार सुमन का कहना है कि उन्होंने ही इस परियोजना को गति दी और यह सुनिश्चित किया कि इसका कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा हो.

वे तर्क दे रहे हैं कि उनके निरंतर फॉलो-अप और राज्य सरकार के साथ समन्वय ने ही इस कॉरिडोर को वास्तविकता में बदला है. श्रेय लेने की होड़ ने स्थानीय राजनीति में गरमाहट ला दी है, क्योंकि दोनों ही दल आगामी चुनावों में इस विकास परियोजना को अपनी उपलब्धि के रूप में भुनाने की कोशिश कर रहे हैं.




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