MUZAFFARPUR

बिहार के सरकारी स्कूल में बढ़ने वाला है एजुकेशन की क्वालिटी! शिक्षकों और छात्रों पर एस सिद्धार्थ रखेंगे पैनी नजर

बिहार सरकार ने राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने और शिक्षण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है — एकेडमिक मॉनिटरिंग योजना। यह योजना 81,223 सरकारी विद्यालयों को कवर करेगी और इसका संचालन राज्य के अध्यापक प्रशिक्षण संस्थानों के संकाय सदस्यों द्वारा किया जाएगा।

यह योजना केवल स्कूलों की शैक्षणिक समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शिक्षकों को व्यावसायिक रूप से मार्गदर्शन देना, शिक्षण विधियों का अवलोकन करना और छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन का मूल्यांकन करना है।

योजना में शामिल विद्यालयों का वितरण

इस योजना में राज्य के तीन स्तरों के विद्यालयों को सम्मिलित किया गया है:

40,556 प्राथमिक विद्यालय

31,297 मध्य विद्यालय

9,360 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय

इन सभी विद्यालयों को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय, प्रखंड शिक्षक शिक्षा संस्थान और शिक्षक शिक्षा महाविद्यालयों से जोड़ा गया है। इन संस्थानों के प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने संकाय सदस्यों को टैग किए गए विद्यालयों की ज़िम्मेदारी सौंपें।

शिक्षकों के शिक्षण शैली पर केंद्रित समीक्षा

सिर्फ उपस्थिति और बुनियादी ढांचे का निरीक्षण ही नहीं, बल्कि यह योजना शिक्षकों की कक्षा में पढ़ाने की शैली और छात्रों के सीखने के स्तर पर भी बारीकी से नजर रखेगी। मुख्य मूल्यांकन बिंदु निम्नलिखित होंगे।

शिक्षक और छात्र उपस्थिति

कक्षा संचालन की गुणवत्ता

शिक्षण सहगामी गतिविधियां

आधारभूत ढांचे की स्थिति

शिक्षकों की सेवाकालीन आवासीय प्रशिक्षण की प्रभावशीलता

इस तरह की व्यापक जांच प्रणाली से राज्य में एक पारदर्शी, जवाबदेह और डेटा-संचालित शिक्षा व्यवस्था की नींव रखी जा रही है।

रिपोर्टिंग और गुणवत्ता मानकों की स्थापना

सभी संकाय सदस्यों को निरीक्षण के पश्चात एक निर्धारित फॉर्मेट में रिपोर्ट तैयार कर के राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) को सौंपनी होगी। इससे पूरे राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए एक समान मानक स्थापित होंगे और सुधारात्मक कार्रवाई करना आसान होगा।

शिक्षा में यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है?

बिहार जैसे बड़े राज्य में जहां सरकारी विद्यालयों की संख्या 80,000 से अधिक है, वहाँ शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सामूहिक और संरचित प्रयास की आवश्यकता है।

यह योजना उसी दिशा में एक सशक्त कदम है, जिससे राज्य के बच्चों को बेहतर शिक्षण मिलेगा।शिक्षकों को उनकी कमजोरियों और सुधार के क्षेत्रों की जानकारी मिलेगी। शासन को वास्तविक समय पर ग्राउंड रिपोर्ट मिल सकेगी। शिक्षा प्रणाली में विश्वास और गुणवत्ता बढ़ेगी।

 

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