MUZAFFARPUR

बिहार में BDO घूस लेते गिरफ्तार, निगरानी विभाग ने रंगे हाथ सरकारी आवास से दबोचा और म

अररिया: बिहार निगरानी विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है. इसी कड़ी में अररिया में बड़ी कार्रवाई की गयी है. रानीगंज बीडीओ को निगरानी टीम ने घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. साथ में बीडीओ के अकाउंटेंट को भी गिरफ्तार किया है. दोनों से टीम पूछताछ के लिए पटना ले गयी है.

योजना की राशि के बदले डिमांड

निगरानी टीम ने यह कार्रवाई रानीगंज प्रखंड उप प्रमुख कलानंद सिंह उर्फ कैलू की शिकायत की है. दरअसल, उप प्रमुख ने निगरानी विभाग से बीडीओ पर घूस मांगने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करायी थी. इन्होंने आरोप लगाया कि योदना का काम पूरा होने के बाद राशि स्वीकृत करने के बदले रुपये की डिमांड की जा रही थी.

25 हजार दे चुके हैं घूस: उप प्रमुख ने बताया कि पूर्व में भी इस काम के बदले 25 हजार रुपए बीडीओ को दे चुके हैं. इसके बावजूद बीडीओ की ओर से 1.50 लाख रुपए की डिमांड की जा रही थी. जिसकी शिकायत उन्होंने निगरानी विभाग पटना में की थी.

इस तरह बिछाया जाल: सोमवार को निगरानी डीएसपी चंद्रभूषण के नेतृत्व में एक टीम अररिया पहुंची थी. जाल बिछाने के लिए उप प्रमुख को प्रखंड मुख्यालय भेजा गया. बीडीओ फोन किया गया तो बीडीओ ने अकाउटेंट को रुपया देने की बात कही. इसके बाद कलानंद सिंह ने 1.50 लाख रुपए अकाउटेंट को दिए.

1.50 लाख लेते गिरफ्तार: इसी बीच टीम लगातार नजर बनायी हुई थी कि बीडीओ के पास राशि कब पहुंचती है. जैसे की अकाउटेंट बीडीओ के पास आवास में 1.50 लाख रुपये लेकर पहुंचे निगरानी टीम ने रानीगंज बीडीओ रीतम लाल चौहान और कार्यपालक सहायक आदित्य प्रियदर्शी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया.

दस्तावेज खंगाल रही टीम: विजिलेंस की टीम बीडीओ आवास और कार्यालय के दस्तावेज को खंगाले में जुटी हुई है.

विजिलेंस डीएसपी चन्द्रभूषण कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टी करते हुए बताया की बिशेष निगरानी इकाई के द्वारा रानीगंज BDO रितम चौहान और अकाउंटेंट आदित्य प्रियदर्शी को 1 लाख 50 हजार रूपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है.

बिना चढ़ावा काम नहीं’: बीपीएससी 62वीं बैच के अधिकारी रीतम चौहान की गिरफ्तारी के बाद निगरानी ने दोनों आरोपी पर एफआईआर दर्ज कर पूछताछ के लिए पटना ले गयी.

इस तरह बीडीओ की गिरफ्तारी से जिले में भ्रष्टाचार के पोल खुल गए. लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं. स्थानीय लोग कहते हैं कि यहां बिना चढ़ावा चढ़ाए सरकारी अधिकारी काम नहीं करते हैं.

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