भागलपुर: जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में सर्च ऑपरेशन के दौरान भागलपुर के रहने वाले आर्मी के एक जवान शहीद हो गये हैं. शहीद जवान भागलपुर जिले के नवगछिया इस्माइलपुर भिट्ठा गांव निवासी चंद्रदेव यादव का पुत्र संतोष कुमार हैं.

बताया जा रहा है कि नौशेरा सेक्टर में आर्मी के सर्च ऑपरेशन के दौरान घटना घटी है. घटना किन कारणों से घटी है, इसकी अधिकृत जानकारी नहीं मिल पाई है. परिजनों ने संतोष यादव के शहीद होने की पुष्टि की है.

पार्थिव शरीर पैतृक गांव लाने की तैयारी
बृजेश यादव ने बताया कि रूपक यादव पीरपैंती बकिया दियारा के रहने वाले हैं, वह भी आर्मी में नौशेरा सेक्टर के पास ही ड्यूटी पर तैनात है. उन्होंने अपनी बहन संतोष की पत्नी साधना कुमारी को फोन कर घटना की जानकारी दी है. जिसके बाद हम लोगों ने यूनिट को भी फोन लगाकर घटना के बारे में जानकारी ली है. उन्होंने बताया कि पार्थिव शरीर लाने की तैयारी की जा रही है.

3 महीने पहले आए थे घर
बृजेश बताते हैं कि शाहिद संतोष कुमार 3 साल से जम्मू कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में तैनात थे. 3 महीना पहले ही वह घर आए थे. रोजाना फोन पर परिवार वालों से बातचीत होती थी.

भारत पाकिस्तान के बीच तनाव के बारे में चर्चा होती थी. संतोष अपने परिवार वालें को कहते थे कि अभी ज्यादा बातचीत नहीं कर पाएंगे क्योंकि बिजी हैं. बात पहले जैसा नहीं होती थी कम होती थी लेकिन रोजाना बात होती थी.

चार बच्चों के पिता हैं संतोष
शहिद संतोष को तीन बेटी एक बेटा है. बड़ी बेटी दीक्षा कुमारी इसी वर्ष दसवीं की परीक्षा फर्स्ट डिवीजन से पास की है. दूसरी बेटी दीप्ति कुमार नाइंथ में पढ़ रही है. जबकि तीसरी बेटी इशिका कुमारी सातवीं कक्षा में पढ़ रही है. सबसे छोटा बेटा 4 साल का लक्ष्य कुमार है.

परिवार और गांव में मातम
शहीद जवान संतोष के घर घटना की सूचना मिलने के बाद पूरे परिवार में कोहराम मच गया. सेना की ओर से शहीद संतोष के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव भिट्ठा लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. जवान के शहीद होने की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया है. गांव के लोग शोकाकुल हैं और शहीद को अंतिम विदाई देने की तैयारी में जुट गए हैं.

बिहार के कई जवान शहीद
बता दें कि भारत पाकिस्तान तनाव के बीच बिहार के कई लाल अपना बलिदान दे चुके हैं. छपरा के इम्तियाज और सिवान के रामबाबू सिंह शहीद हुए हैं.

वहीं नवादा के मनीष कारगिल में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए. नालंदा जिले के उतरथु गांव के सिंकदर, जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात थे. जहां 13 मई को देश की रक्षा करते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी.



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