MUZAFFARPUR

बिहार चुनाव में प्रभावी होगा नीतीश का ‘दीदी दांव’? 1 करोड़ 40 लाख जीविका वोट बैंक पर नजर

पटना: तो लीजिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शह और मात देने की बिसात बिछा दी और यह मात ऐसा कि विपक्षियों के होश उड़ाने के लिए काफी है. नीतीश का यह अचूक शस्त्र है बिहार की एक करोड़ 40 लाख जीविका दीदी. जीविका दीदी विधानसभा चुनाव में एक बड़े वोट बैंक के रूप में भूमिका निभाएंगी. इसका लाभ नीतीश कुमार लेना चाहते हैं. बिहार चुनाव पर इन दिनों हर किसी की नजरें बनी हुई है लेकिन बिहार सरकार ‘जीविका दीदी’ पर मेहरबान है.

जीविका दीदी पर चुनावी दांव

पिछले कुछ महीनो में जीविका दीदियों के लिए नीतीश सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं. उनमें से एक बड़ा फैसला कोऑपरेटिव बैंक खोलने का भी है जिससे जीविका दीदियों को आसानी से लोन मिल सके और व्यापार कर सकें. एक करोड़ 40 लाख जीविका दीदी आज बड़ा वोट बैंक बन चुकी है. हर साल हजारों करोड़ का कारोबार करती हैं.

बिहार में शराबबंदी में अहम रोल

जीविका दीदियों के कहने पर बिहार में शराबबंदी भी लागू किए और कई बड़े फैसले लिए हैं. चुनावी साल में यह वोट बैंक खिसक ना जाए इसलिए अब कोऑपरेटिव बैंक बनाने का बड़ा फैसला लिया गया है जो जीविका दीदी को आसानी से लोन उपलब्ध कराएगी.

बैंकिंग कार्य में दक्ष हो गई है जीविका दीदी’

जीविका की दीदी आज बैंकिंग कार्य में दक्ष हो गई हैं. जीविका के वैकल्पिक बैंकिंग मॉडल के तहत 56 बैंक सखियों के माध्यम से ग्राहक सेवा केंद्र की स्थापना करके ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय लेनदेन का काम कर रही है. जीविका के सखी मॉडल के तहत मछली पालन, मधुमक्खी पालन जैसे बड़े काम किए जा रहे हैं.

जल जीवन हरियाली अभियान के तहत 32 जिलों के 109 प्रखंड में स्वयं सहायता समूह द्वारा मछली पालन का काम शुरू किया गया है. 124 तालाब इन्हें आवंटित की गई है इसमें से 91 में मछली पालन सफलतापूर्वक इनके द्वारा किया जा रहा है . मधुमक्खी पालन के तहत 419 उत्पादक समूह के जरिए 11789 परिवारों को जोड़ा गया है.

जीविका दीदी के रसोई की भी खूब चर्चा

दीदी की रसोई की चर्चा इन दिनों खूब हो रही है. समुदाय आधारित कैंटीन पूरी तरह से महिलाओं के स्वामित्व वाला उद्यम है. आज 115 इकाइयां जीविका के द्वारा स्थापित की गई हैं कई राज्यों की टीम इसे देखने पहुंच रही है. नीतीश सरकार ने अस्पतालों में कैंटीन की जिम्मेदारी जीविका दीदियों को ही दे रखा है. कई सरकारों में भी कैंटीन की जिम्मेदारी जीविका के पास ही है.

जीविका दीदी को मिलेगी मिड डे मील की जिम्मेदारी

स्कूलों के मिड डे मील की जिम्मेदारी भी जीविका दीदी को देने की तैयारी हो रही है. इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र में 50 लाख से अधिक बच्चों के ड्रेस की जिम्मेदारी भी जीविका दीदियों को दी गई है. बिहार में सुधा बहुत फेमस कोऑपरेटिव संस्था है. अब उसी तर्ज पर जीविका दीदी भी दूध का व्यवसाय करेंगी. यह सरकार ने फैसला लिया है.

किराना दुकान से जोड़ा रोजगार

स्वयं सहायता समूह को 9000 से अधिक किराना दुकान की सेवाएं उपलब्ध करवा कर रोजगार से जोड़ा गया है. कृषि के क्षेत्र में 14.72 लाख किसान धान की, 13.2 लाख किसान गेहूं की खेती कर रही हैं 9.33 लाख किसान सब्जियों की खेती कर रही है और 15.44 लाख रसोई बारी लगाई है.

1.8 लाख स्वयं सहायता समूह सदस्य मुर्गी पालन, 1.23 लाख सदस्य दूध उत्पादन, 3.5 लाख बकरी पालन और 2.3 लाख कृषि के अन्य काम में लगी हुई हैं . कृषि कार्य के लिए जीविका दीदी को ड्रोन की भी ट्रेनिंग दी गयी है.

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